फतेहपुर। गरीब मरीजों को महंगी जांच निशुल्क मुहैया कराने के लिए शुरू की गई सुविधा फिलहाल अव्यवस्थाओं के मकड़जाल में फंस गई है। जिला अस्पताल के चंदन लैब में पिछले चार दिन से सभी जांचें बंद हैं। यहां करीब डेढ़ सौ जांचों की सुविधा है। शासन स्तर से संस्था को भुगतान न किए जाने से अधिकारियों ने जांच करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में रोजाना बड़ी संख्या में मरीजों को बिना जांच कराए ही लौटना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को प्राइवेट पैथोलॉजी में महंगी जांचों से राहत दिलाने के लिए प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में करार कर सुविधा शुरू की। मौजूदा समय सभी अस्पतालों में प्राइवेट लैब के टेक्नीशियन रोजाना तय समय से आते हैं। मरीजों को सैंपल लेकर जांच के लिए लैब ले जाते हैं। यहां से जांच रिपोर्ट संबंधित
विभाग के चिकित्सक के पास प्रेषित की जाती है। जिला अस्पताल में वैसे तो जांच की सुविधा के लिए पैथोलॉजी बनी हुई है लेकिन महंगी जांचों के लिए मरीजों को प्राइवेट सेंटर या फिर इलाहाबाद, कानपुर जाना पड़ता है। मरीजों को सुविधा देने के लिए जिला अस्पताल में चंदन लैब शुरू हुई। सूत्रों के मुताबिक करीब पांच महीने से विभिन्न मद से खर्चों से संबंधित बिलों का भुगतान शासन स्तर से नहीं किया। इस दौरान कई बार भुगतान कराने के लिए
पत्राचार भी किया गया। धनराशि न मिलने से लैब में विभिन्न जांचों के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायन, किट व अन्य सामग्री की आपूर्ति बंद हो गई। ऐसे में संस्था ने जिला अस्पताल में संचालित जांच की सुविधा बंद कर दी है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 55 से 60 मरीजों के सैंपल लिए जाते रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा किडनी, लीवर, थायराइड आदि की जांच के लिए रोगी आते हैं। चंदन लैब में अलग-अलग करीब डेढ़ सौ जांचों की सुविधा मुहैया
कराई जाती है। यहां पर पांच सौ से लेकर पांच हजार रुपये तक की जांचों की सुविधा का लाभ मरीजों को मिल रहा था, जो बंद हो गया है। लैब के कर्मचारियों ने बताया कि अक्तूबर से फरवरी तक का पेमेंट न होने से जांचे रोक दी गई हैं। सरकार ने गरीबों को निशुल्क जांच के लिए चंदन लैब को जिला अस्पताल में संसाधन व स्टाफ
दिया है। यहां एक लैब टेक्नीशियन व एक सहायक की भर्ती है। इन्हें काम की सैलरी मिल रही है। जिला अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि जब कोई व्यक्ति सरकारी पर्चे पर जांच कराता है तो उसे कोई रुपया नहीं देना होता है। संसाधनों पर आए खर्च का भुगतान सरकार चंदन लैब को करती है। पांच माह से यही संसाधन खर्च लाखों रुपये बकाया होने की वजह से कम ठप हो गया है।
इनसेट --
कुछ प्रमुख जांचे
किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी)
लीवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी)
थायराइड - 450 रुपये
तीन महीने का रेसियो शुगर
विटामिन- कैल्शियम पोटेंसी टेस्ट
एचआईवी-वीडीआरएल
इन्फेक्शन की विभिन्न जांचें
जिला अस्पताल आए मरीजों ने बताई परेशानी
फोटो-20- जिला अस्पताल आए जमरावां के राम सिंह ने बताया कि वह पिछले एक हफ्ते से बीमार हैं। मल और पेशाब की दिक्कत है। डाक्टर ने किडनी की जांच कराने के लिए कहा। चंदन लैब में जांच कराने आए तो बोले की अभी जांच नहीं हो रही है।
फोटो-21- छिवलहा की रहने वाली माधुरी देवी थायराइड की समस्या से जूझ रही हैं। डाक्टर ने थायराइड की जांच कराने को कहा। जब जिला अस्पताल के चंदन लैब में गए तो जांच नहीं हुई। पता चला जांचें बंद हो चुकी हैं। अब प्राइवेट जांच करानी पड़ेगी।
फोटो-22- मसवानी के रहन वाले अंकित श्रीवास्तव ने बताया कि जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं का मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। रोगियों के साथ छलावा हो रहा है। महंगी जांच फ्री होने के नाम पर भटक रहे हैं। थायराइड की जांच करानी है लेकिन नहीं हो सकी।
फोटो-23- शहर के चंदियाना मोहल्ला निवासी उमा देवी ने बताया कि जिला अस्पताल में चंदन लैब खुलने से मरीजों को काफी लाभ मिल रहा था, लेकिन अव्यवस्था के चलते सेवा ठप हो गई है। डाक्टर ने लीवर की जांच के लिए लिखा है लेकिन नहीं हो पा रही है।
वर्जन
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. प्रभाकर ने बताया कि शासन को पत्र भेजकर समस्या से अवगत करा दिया है। शासन स्तर का मामला है। भुगतान के लिए कई बार पत्राचार भी किया गया है। अस्पताल में जो भी संसाधन उपलब्ध हैं उन्हीं से मरीजों को सेवा दी जा रही है। चंदन लैब का मामला भी जल्द निपटाया जाएगा।
फोटो- 7- जिला अस्पताल के चंदन लैब में जांचे बंद होने से खड़े कर्मचारी।
जिला अस्पताल के चंदन लैब में जांचें बंद
शासन स्तर से बिलों का भुगतान न होने से आई समस्या
किडनी, लीवर, थायराइड, इन्फेक्शन समेत कई गंभीर जांचों के मरीज लौट रहे
अमर उजाला ब्यूरो