अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। अमृत योजना से शहरी मजरों को पेयजल देने की परियोजना बाधित हो सकती है। 11 करोड़ 34 लाख की इस योजना को चलाने के लिए निकाय को अपने हिस्से की 20 प्रतिशत अंशराशि करीब सवा दो करोड़ रुपये जमा करनी पड़ेगी। निकाय के लिए यह परेशानी का सबब बन गई है।
अमृत योजना के तहत शहर की पेय जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त की जानी है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 11 करोड़ 34 लाख की परियोजना स्वीकृत की है। इसमें 60 प्रतिशत धनराशि केंद्र और 20-20 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार और संबंधित निकाय को खर्च करना है। परियोजना के तहत नगर पालिका परिषद ने शहरी मजरे शेषपुर उनवा, मिट्ठनपुर, बीबीपुर, मऊ और माहपुर में एक-एक नलकूप और ओवरहेड टैंक बनाने की स्वीकृति दी है। केंद्र ने अपने हिस्से की धनराशि जलनिगम को हस्तांतरित कर दी है। धनराशि मिलते ही कार्यदायी संस्था ने मिट्ठनपुर और मऊ में नलकूप की बोरिंग का काम शुरू करा दिया है। राज्यांश भी जल्द आने की उम्मीद है लेकिन निकाय को अपने हिस्से की 20 प्रतिशत धनराशि एकत्र करना कठिन है।
सूत्रों का कहना है कि शासन से मिलने वाला मासिक बजट दो करोड़ 11 लाख से घटकर एक करोड़ 61 लाख में सिमट गया है। इस धनराशि से वेतन, पेंशन आदि का भुगतान होने के बाद नौ से 10 लाख शेष बचता है, जिससे निकाय के अन्य खर्चे चलते हैं। ऐसे में निकाय को अंशराशि जमा करने के लिए करीब सवा दो करोड़ की धनराशि कहां से मिलेगी यह चिंता का विषय है।
दूसरी ओर ईओ रश्मि भारती का कहना है कि शहरवासियों पर विभिन्न करों की बड़ी धनराशि बकाया है। निकाय पूरा प्रयास कर राजस्व वसूली से अंशराशि जुटाने की कोशिश करेगी। इसके अलावा 14वें वित्त या राज्य वित्त की धनराशि भी प्रशासन की अनुमति से अंशराशि जमा की जा सकती है।
एक साल में पूरी होनी है परियोजना
फतेहपुर। जलकल के अवर अभियंता गौरीशंकर पटेल का कहना है कि शहरी ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल की गंभीर समस्या को देखते हुए अमृत योजना का लाभ चार गांवों में देने का निर्णय लिया गया है। सब ठीकठाक रहा तो 31 मार्च 2019 तक परियोजना पूरी हो जाएगी।