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ढाई सौ राजकीय नलकूप बने शोपीस

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फतेहपुर। जिले के 533 सरकारी नलकूपों में ढाई सौ ज्यादा शोपीस बने हैं। जलस्तर घटने और नई बोरिंग न होने से करीब दो सौ राजकीय नलकूप बंद हैं। इसके अलावा 65 नलकूप यांत्रिक और बिजली की गड़बड़ी से शोपीस बने हुए हैं। नतीजतन किसानों को मुफ्त सिंचाई योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
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प्रदेश सरकार की मुफ्त सिंचाई योजना छलावा बनी हुई है। राजकीय नलकूप के सहारे खेती करने वाले किसानों को फसलों की सिंचाई करने में परेशानी उठानी पड़ती है। जो राजकीय नलकूप जलस्तर घटने से बंद हो गए हैं। तमाम जस के तस पड़े हुए हैं। उनमें मोटर और नीचे करने के लिए पाइप नहीं डाले जा रहे हैं। करीब छह महीना से
200 राजकीय नलकूप जलस्तर की कमी से बंद हैं। 25 राजकीय नलकूप मोटर, स्टार्टर और पाइप की खराबी से बंद हैं। 40 राजकीय नलकूप के ट्रांसफार्मर, केबिल, बिजली के तार की खराबी से बंद है। इनको सही कराने में राजकीय नलकूप खंड के अधिकारी अनदेखी किए हैं। मंडासराय गांव के किसान कल्लू सिंह ने बताया कि राजकीय नलकूप की आठ महीना से मोटर खराब हैं। इसको सही कराने के लिए नलकूप आपरेटर से कई बार कहा गया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सरकंडी गांव के किसान मनीष तिवारी ने कहा कि राजकीय नलकूप में 440 के बदले 180-200 वोल्टेज करंट आता है। इससे नलकूप की मोटर नहीं चलती हैं। फसलों की सिंचाई के लिए निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ता है। सरकार की फ्री सिंचाई योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
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वर्जन
अधिशासी अभियंता किशनलाल ने बताया कि पुराने राजकीय नलकूपों में 100 फीट की गहराई तक मोटर नीचे ले जाने की क्षमता है। जिन नलकूपों में इससे नीचे जलस्तर है, उनमें मोटर नीचे ले जाना संभव नहीं है। चलने वाले नलकूपों में कमी आती रहती है। एक को सही कराया जाता है तो दूसरा खराब हो जाता है। यह रूटीन प्रक्रिया है।
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