बिंदकी। चल पड़े जिधर दो डग मग में, चल पड़े कोटी पग उसी ओर, गड़ गई जिधर भी एक दृष्टि, गड़ गए कोटि दृश्य उसी ओर जैसी कालजयी रचना करने वाले राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी की 107 वीं जयंती मंगलवार को मनाई गई। प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया गया।
नगर के रामलीला मैदान के निकट स्थित श्री सोहनलाल द्विवेदी पुस्तकालय वाचनालय परिसर में यह आयोजन हुआ। सबसे पहले राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी की प्रतिमा पर उनकी एक सौ सातवीं जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर प्रभारी उप जिलाधिकारी प्रमेश श्रीवास्तव ने कहा की राष्ट्रकवि ने बाल रचनाओं से लेकर देश प्रेम, गांधीवादी विचारधारा पर जो भी रचनाएं लिखीं, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है। समाजसेवी लोकनाथ पांडेय ने कहा कि राष्ट्रकवि सोहन लाल द्विवेदी ने भैरवी वास, दत्ता पूजा, गीत, विष पान, जय गांधी सहित तमाम प्रमुख कृतियां लिखी थी। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को भी एक रास्ता दिखाती रहेंगी। इस मौके पर उनके पौत्र रिटायर्ड फाइटर पायलट प्रकाश चंद्र द्विवेदी, सोनू दिवेदी, पूनम दिवेदी, सहित उपस्थित लोगों ने व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी की मनाई गई जयंती
- प्रभारी उप जिलाधिकारी सहित तमाम लोगों ने अर्पित की पुष्पांजलि