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पीएमओ दफ्तर से आया डीएम को फोन

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहपुर। ससुर खदेरी नदी पर मनरेगा से जीर्णोद्धार के काम ने जिले को बाहरी परिदृश्य पर पहचान दी। पीएमओ दफ्तर एक बार फिर जिले में ऐसे ही किसी काम की अपेक्षा कर रहा है। इसका खुलासा तब हुआ जब सोमवार की दोपहर जिलाधिकारी कुमार प्रशांत के पास पीएमओ दफ्तर से फोन आया। पहले पूछा गया कि नीति आयोग से जिले में कैसे और किस तरह के काम हो रहे हैं। काम सुनने के बाद कहा गया कि कुछ ससुर खदेरी की तर्ज पर काम कीजिए तो बात बने।

दरअसल फतेहपुर जिले को अतिपिछड़ा घोषित करने के बाद से उसे अगड़ा बनाने की शासन स्तर से कवायद तेज हो गई है। केंद्र और राज्य सरकार स्तर से लगातार कुछ नया करने को सोचा जा रहा है। इसी वजह से प्रधानमंत्री कार्यालय से जिलाधिकारी को आए फोन में नीति आयोग के तहत जिले में हुए कुछ अलग यानी लीक से हटकर हुए कार्यों का ब्योरा मांगा गया।
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डीएम ने पीएमओ दफ्तर के अफसर को बताया कि जनपद में स्मार्ट क्लास की सुविधा शुरू की गई है। बड़े पैमाने पर परिषदीय विद्यालय के बच्चों को कान्वेंट स्कूल की तर्ज पर प्रोजेक्टर से शिक्षा दी जा रही है। स्वत: रोजगार के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को डेवलप कर प्रत्येक ब्लाक में उनकी कैंटीन चलवाई जा रही है। इससे काफी लोगों को सम्मानजनक रोजगार मिला है।

पीएमओ ने इन दोनों ही कार्यों पर जिले से फोटो, वीडियो व लेख के माध्यम से सूचना मांगी है। पीएमओ से बातचीत के आधार पर डीएम कुमार प्रशांत ने सीडीओ चांदनी सिंह को स्मार्ट क्लास और स्वयं सहायता समूह की जानकारी कंपाइल कर जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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डीएम ने कहा कि पीएमओ ससुर खदेरी की तर्ज पर कुछ अलग व अभिनव कार्य कराने का इच्छुक है। इस वजह से कुछ अलग प्रस्ताव तैयार कर चर्चा करने को कहा है।।

ससुर खदेरी पुनरुद्धार ने बटोरी थी सुर्खियां
फतेहपुर। वर्ष 2012-13 में तत्कालीन जिलाधिकारी कंचन वर्मा ने जिले में लगभग लुप्त हो चुकी ससुर खदेरी नदी का जीर्णोद्धार मनरेगा से कराया था। जिले में स्वतंत्रता से पहले ससुर खदेरी-1 व ससुर खदेरी-2 नदियां बहती थीं। ये दोनों नदियां जिले की कई झीलों से निकलकर फतेहपुर और इलाहाबाद के बीच दो सौ किलोमीटर का मार्ग तय करते हुए यमुना नदी में मिलती थीं। ससुर खदेरी-2 जिले में शहर से करीब 25 किमी दूर ठिठौरा गांव से सटी एक झील से निकलती थी और लगभग 80 किमी का प्रवाह क्षेत्र तय कर विजयीपुर गांव के पास यमुना में मिलती थी। बाद में अवैध कब्जों के चलते यह सूख गई। तत्कालीन जिलाधिकारी कंचन वर्मा, भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी प्रदीप श्रीवास्तव व स्वामी विज्ञानानंद के प्रयास से जागरुकता व पुनर्जीवन का काम शुरू हुआ। तेलियानी विकास खंड के ठिठौरा गांव में नदी के उद्गम स्थल से मनरेगा मजदूरों ने नदी की खुदाई शुरू की थी। बिना किसी मशीन के नदी को जीवित कर देने के इस काम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली। ससुर खदेरी-2 पुनर्जीवित हो गई। आसपास के इलाकों में जलस्तर बढ़ गया। हालांकि अब यह फिर सूख गई है। एक चंद्राकार झील का निर्माण हुआ, दायरा करीब नौ किमी का है। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं भी हैं। अब भी माना जा रहा है कि यदि इस पर काम हो और ससुर खदेरी-एक से संबंधित लंबित परियोजना भी मंजूर हो जाए तो पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। नीति आयोग के तहत ऐसे ही किसी तरह के काम को पूरा कराकर नजीर पेश करना चाह रहा है।
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