फतेहपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) के प्रबंधन व जिला प्रशासन के बीच ठन गई है। जिला प्रशासन ने लगातार हो रही हीलाहवाली को देख कड़ा रुख अपना लिया। उधर, एनएचएआई प्रबंधन ने जिला प्रशासन के डायवर्जन से प्रतिदिन लाखों रुपये के नुकसान का हवाला देते हुए उसे मानने से इंकार कर दिया है। दरअसल मौहार हादसे के बाद यह मामला उभरकर सामने आया है।
बता दें कि कुंभ मेले की तैयारियों और नेेशनल हाईवे पर व्यवस्था बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पिछले दिनों एक बैठक की गई थी। डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि उस बैठक में एनएचएआई के लोग भी आए थे। यह तय हुआ था कि कुंभ के लिए कानपुर से प्रयागराज का यह मुख्य मार्ग है। इस वजह से डायवर्जन भी होना
है। हाईवे पर इसके लिए जगह-जगह संकेतक लगाए जाएं। बैठक में सब ठीक रहा लेकिन अभी कुछ दिन पहले एनएचएआई की ओर से एक पत्र आया जिसमें डायवर्जन संकेतक की बात तो दूर यह कहा गया कि जिला प्रशासन के डायवर्जन को वह नहीं मान सकते। इस डायवर्जन से उन्हें प्रतिदिन का लाखों रुपये का नुकसान हो जाएगा। वह
इसे नहीं मानेंगे। पत्र आने के बाद जिला प्रशासन विचार ही कर रहा था कि मौहार हादसा हो गया। इसके बाद डीएम ने रूट डायवर्जन मानने में हीलाहवाली, अवैैध कट होने के बावजूद उसे संज्ञान में न लेकर लोगों की जान जोखिम में डालने का हवाला देकर एसपी राहुल राज से जांच कर रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा। इधर, एसपी राहुल राज का कहना है कि वह भी इस बैठक में थे, तय भी हुआ था लेकिन एनएचएआई ने डायवर्जन से नुकसान की बात कह पूरी व्यवस्था को दिक्कत पैदा कर दी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्रबंधन व जिला प्रशासन में ठनी
- मौहार बस हादसे के बाद उछला मामला
- एनएचएआई ने प्रशासन के रूट डायवर्जन को नकारा
अमर उजाला ब्यूरो