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दो लाख शौचालय बनाना आसान नहीं

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहपुर। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत घर-घर शौचालय बनवाने की गति बहुत ही धीमी है। इसके निर्माण की समय सीमा 31 दिसंबर को खत्म हो रही है जबकि पंचायत राज विभाग महज 50 हजार के आसपास ही शौचालय बनवा सका है। ऐसी दशा में महीने भर के अंदर पहाड़ जैसा लक्ष्य हासिल करना नामुमकिन दिख रहा है।

जिले के 13 ब्लाकों में जिला पंचायतराज विभाग की ओर से शौचालय निर्माण कराया जा रहा है। इस योजना में बीपीएल और अंत्योदय योजना से जुड़े लोगों के साथ एपीएल श्रेणी के विधवा, निराश्रित और निशक्त को भी शामिल किया गया है। सरकार 12 हजार रुपये एक शौचालय पर खर्च कर रही है। हालांकि अभी तक सिर्फ पहली किस्त ही जारी हुई है।
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ढाई महीने पहले मिली किस्त खत्म होने के बाद तमाम लाभार्थी दूसरी किस्त के इंतजार में शौचालय का निर्माण बीच में छोड़कर बैठ गए हैं। ऐसे में विभाग के समक्ष लक्ष्य की भरपाई चुनौती बन चुका है। सीडीओ एसपी आनंद का कहना है कि जो काम रह गया है, पूरा कराएं।
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दूसरी किस्त का रुपया भी जल्द मिल जाएगा। डीपीआरओ सरोज कहते हैं कि जिले में मौरंग और बालू के संकट के चलते शौचालय निर्माण को शुरुआत में अपेक्षित गति न मिलना भी लक्ष्य के पिछड़ेपन की एक वजह है। करीब दो लाख शौचालय का निर्माण होना बाकी है। दिसंबर तक का वक्त है। वैसे पता चला है कि टारगेट रिवाइज हो रहा है। इससे काम करने का समय मिलेगा।

31 तक कैसे बनेंगे दो लाख शौचालय
लक्ष्य ढाई लाख, अभी तक बन पाए हैं सिर्फ 50 हजार
पहली किस्त के बाद धन न मिलने से निर्माण में नहीं आई तेजी
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