फतेहपुर। बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करने के लिए चिकित्सा विभाग में कैडर-2004 की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसके तहत अब विशेषज्ञ डॉक्टर प्रशासनिक काम नहीं देखेंगे। उनकी सेवा केवल मरीजों के इलाज तक सीमित रहेगी। हालांकि डाक्टरों के ही आंतरिक विरोध के कारण पूर्व में एक बार यह कैैडर पद्धति फेल भी हो चुकी है। पिछले डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने इसे अपनी पहल से लागू करवाया था। अब इस संबंध में शासन से भी निर्देश आ गए हैं।
इस व्यवस्था के तहत एमडी और एमएस की डिग्री वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों से कोई प्रशासनिक काम नहीं लिया जाएगा। उन्हें सिर्फ मरीजों के इलाज की ड्यूटी में लगाया जाएगा। इसके उलट अस्पतालों में एसीएमओ और डिप्टी सीएमओ जैसे पद एमबीबीएस डिग्री वाले डाक्टर वरीयता के आधार पर संभालेंगे। यह व्यवस्था पहले भी लागू की गई थी, लेकिन फेल हो गई थी। अब इसे फिर से लागू करने की कवायद पर शासन ने पहल की है। कैडर 2004 की यह व्यवस्था पूर्व में फेल हो चुकी है। दरअसल एलोपैथिक डॉक्टरों के कैडर में एमडी, एमएस और एमबीबीएस के डॉक्टरों को एक ही श्रेणी में रखा जाता है। साल 2004 में इनके कैडर अलग-अलग कर दिए गए। कैडर 2004 में विशेषज्ञ डॉक्टरों को एमबीबीएस के समान ही सुविधाएं दी गईं। इस व्यवस्था 2009 तक लागू रही। इन पांच सालों में पूरी चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई। साल 2009 में विशेषज्ञ डाक्टरों और एमबीबीएस डॉक्टरों को फिर से एक ही श्रेणी में कर दिया गया।
इनसेट-
मुख्यालय में रहेंगे विशेषज्ञ डाक्टर
जिले भर की पीएचसी और सीएचसी में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्वास्थ्य विभाग में कुंडली तैयार हो रही है। इन्हें जनपद मुख्यालय में तैनात किया जाएगा। मरीजों को इलाज के लिए राजधानी अथवा नजदीकी बड़े जनपदों के अस्पतालों में दौड़ न लगानी पड़े, इसलिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे जिला अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी भी दूर हो जाएगी। अभी तक जिला स्तर के अस्पताल में सीएमएस स्तर से डॉक्टरों की जरूरत सीधे शासन को भेजी जाती थी और वहीं से नियुक्ति होती थी। अब नई व्यवस्था के में सीएमएस और सीएमओ आपसी समन्वय से सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात विशेषज्ञों सीएमओ जिला अस्पताल में तैनात करवा सकेंगे।
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बयान-
सीएमओ डॉ. उमाकांत पांडेय ने बताया कि पूर्व जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने पहले ही यह व्यवस्था लागू करने की शुरूआत कर दी थी। शासन का आदेश आ गया है इसका अनुपालन कराया जा रहा है। फिलहाल चार विशेषज्ञ डाक्टरों को प्रशासनिक काम पर ना लगाकर उन्हें मरीजों का इलाज करने के लिए लगाया है।
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