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क्लीन स्कूल ग्रीन स्कूल योजना में बंदरबांट की जांच शुरू

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहपुर। जिले के तीन राजकीय इंटर कालेजों में क्लीन स्कूल-ग्रीन स्कूल योजना में रकम की बंदरबांट के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। गुरुवार को डीआईओएस महेंद्र प्रताप सिंह ने राजकीय बालिका इंटर कालेज और राजकीय इंटर कालेज में हुए कामकाज की जांच की। प्रथम दृष्टया ही घालमेल नजर आया है। डीआईओएस ने कार्ययोजना के तहत काम कराने के लिए आरईएस को पत्र लिखा। इसके साथ अंतिम भुगतान पर भी रोक लगा दी।

तीन साल पहले शासन ने राजकीय बालिका इंटर कालेज बिंदकी, फतेहपुर और राजकीय इंटर कालेज फतेहपुर का चयन क्लीन स्कूल-ग्रीन स्कूल योजना में किया था। इस योजना में प्रत्येक स्कूल को 50 लाख का बजट मिला था। इस बजट से 10 लाख रुपये में फर्नीचर, साढे़ आठ लाख का सौर ऊर्जा प्लांट, छह लाख कीमत के एलईडी पंखे और बल्ब, आरओ शासन स्तर से आपूर्ति कराना था। प्रत्येक स्कूल भवन की मरम्मत आदि में 20 लाख रुपये खर्च किए जाने थे।
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मरम्मत की जिम्मेदारी आरईएस को सौंपी गई थी। इससे छत, दीवार, दरवाजे खिड़कियों की मरम्मत के साथ भवन की रंगाई-पुताई भी कराई जानी थी। कार्यदायी संस्था ने मरम्मत के नाम पर सिर्फ आधे अधूरे भवन की रंगाई-पुताई कराई है। इसके बाद अंतिम भुगतान की मांग कर रहा है। मरम्मत कार्य पांच महीने पहले खत्म हो चुका है।
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मामला बीते दिनों जीजीआईसी में सीडीओ एसपी आनंद के निरीक्षण में खुला। सीडीओ ने मामले की जांच के आदेश डीआईओएस को दिए थे।

गुरुवार को डीआईओएस ने जीआईसी, जीजीआईसी की जांच की। मरम्मत के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पाई गई। डीआईओएस ने बताया कि मरम्मत कार्य भी कार्ययोजना के तहत नहीं कराया गया है। कार्यदायी संस्था से बार-बार कराए गए कार्य का ब्योरा मांगा जा रहा है लेकिन वह नहीं दे पा रही है। ऐसे में फिलहाल 10 लाख जीजीआईसी बिंदकी, पांच-पांच लाख जीजीआईसी और जीआईसी फतेहपुर का अवशेष भुगतान रोक दिया गया है। कार्यदायी संस्था को पत्र लिखकर अधूरा कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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