फतेहपुर। पड़ोसी जिलों के छुट्टा मवेशी तिरहार के किसानों के लिए आफत बन गए हैं। खेत में फसलों को लहलहाने से पहले ही मवेशियों के झुंड एक झटके में नष्ट कर देते हैं। किसानों को अपनी फसलों की रखवाली में दिन और रात एक करना पड़ रहा है। इसके बावजूद भी किसान मेहनत व पसीने की फसल को सुरक्षित करने में नाकाम हैं। यह मवेशी जानलेवा भी साबित हो रहे हैं।
यमुना तिरहार क्षेत्र में वैसे तो यह समस्या काफी साल से है, लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद इलकाई इसमें इजाफा होने की बात करते हैं। गोशालाओं में मवेशियों को बंद करने के बाद भी इनकी संख्या कम नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर जिला के तटवर्ती ग्रामीण अपनी तरफ के मवेशियों को यमुना नदी पार कर इधर छोड़ दिए हैं। इससे इनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। अमौली प्रतिनिधि के अनुसार यमुना
तटवर्ती गांव बारा, ककोरा, रेंगना, चांदपुर, गौरी, आवाजीपुर, रुस्तमपुर, सिकंदरपुर, मवईधाम, दपसौरा, परसेड़ा, निंदापुर, जारा, चकरारा, मानेपुर में 50-50 मवेशियों के झुंड हैं। यह 50 मीटर की दूरी पर भी लोगों को देखते हैं तो खदेड़ लेते हैं। बहुआ प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के ललौली, लमेहटा, कोर्रा, कनक, ओती, दतौली, सैबसी, अढ़ावल गांव में घुमंतू मवेशियों का आंतक बढ़ गया है। यह खेतों में बोई गई फसलों को चरते हैं। इनको खेत से हटाने जाने पर किसानों को खदेड़ कर मारते हैं। अब तो किसान भी इनके डर से खेतों में जाने से बचते हैं। जो
इनको हांकने भी जाते हैं, वह 10-12 लोग लाठी, डंडा लेकर जाते हैं। इसी प्रकार विजयीपुर क्षेत्र के किशनपुर, गढ़ा, चितनपुर, धाना, गिरधरपुर, रायपुर भसरौल, सरौली समेत घुमंतू मवेशी सैकड़ों के झुंड में घूम रहे हैं। मौजूदा समय में किसान 75 फीसदी गेहूं की फसल बोए हुए हैं। सिंचाई भी करा दी है। फसल में थोड़ी सी हरियाली आते ही घुमंतू मवेशियों का यह चारा बन जाती है। चंदापुर गांव के किसान सत्यप्रकाश, रघुराजपुर रारी गांव के राजेंद्र सिंह का कहना है कि कई बार प्रशासन से इस समस्या को हल कराने की मांग की गई है। हर बार सिर्फ आश्वासन हीं मिलता है। काम कुछ भी नहीं हो रहा है।
37- असोथर क्षेत्र के जंगल में घुमंतू मवेशियों का झुंड
पड़ोसी जिलों के छुट्टा मवेशी बने आफत
- फसलों को लहलहाने के पहले ही कर देते हैं नष्ट
- मवेशियों के बढ़ते झुंड लोगों के लिए हो रहे जानलेवा
अमर उजाला ब्यूरो