अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। दादा सोहनलाल द्विवेदी जब रचनाओं में गलतियों पर डांटते थे तो उनकी डांट में भी आशीर्वाद छिपा रहता था। आज उनके मार्गदर्शन पर चलकर रचनाएं लिख रहे हैं। संस्मरणों को याद करते हुए उनके शिष्य शैलेंद्र कुमार द्विवेदी की आंखें भर आईं।
पांच मार्च को राष्ट्र कवि पंडित सोहनलाल द्विवेदी की जयंती मनाई जाएगी। शहर के सिविल लाइन में रहने वाले कवि शैलेंद्र कुमार द्विवेदी दमापुर इंटर कालेज में हिंदी के शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि सन 1980 में जब कक्षा 11वीं में नेहरू इंटर कालेज बिंदकी में पढ़ते थे तो कवि सोहनलाल द्विवेदी के बेटे राम गोपाल द्विवेदी उन्हें हिंदी पढ़ाते थे। इस दौरान शिक्षक रामगोपाल ने अपने पिता सोहनलाल द्विवेदी के बारे में जिक्र किया तो उनसे मिलने की मन में इच्छा हुई।
एक दिन सोहनलाल जी से मिलने उनके घर पहुंच गए। उनके मार्गदर्शन पर कविताएं लिखना शुरू किया और उनके पास जाकर अपनी रचनाएं दिखाई। दादा रचनाएं जांचने पर गलतियों में जरूर डांटा करते थे। वह रोचक और प्रभावशाली कविताएं लिखने को प्रेरित करते थे। देश की आजादी वाली पहली पुस्तक भैरवी दी थी जो आज भी सुरक्षित रखे हैं। गांधी युग के सफल शब्द शिल्पी पंडित सोहन लाल द्विवेदी पर निबंध लिखा था। इसी प्रकार उनकी मृत्यु के बाद स्वर्ग गमन पर ‘शारदा की वीणा के तार, रहो भरते युग युग झंकार, तुम्हारी लय में झूमे विश्व, बरसती रहे सदा रसधार’ रचना लिखी। जीवन काल पर ‘स्वर्ण लेखनी लेकर लिखने वाले आप ज्योति के छंद, राष्ट्र श्रवण में अभी भैरवी के गुंजित हैं गीत अमंद’ कविता लिखी। बताया कि उनकी याद में रविवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन होगा।