अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। माध्यमिक शिक्षा विभाग का सिर्फ छह महीने में सत्र खत्म हो गया। जुलाई से पढ़ाई शुरू होने के बाद जनवरी में वार्षिक परीक्षा प्रारंभ हो गई है। अभी तक कोर्स भी पूरा नहीं है। ऐसे में अधूरे पाठ्यक्रम से माध्यमिक स्कूलों में वार्षिक परीक्षा की औपचारिकता पूरी कराई जा रही है।
शिक्षा सत्र परिवर्तन के तीन साल हो चुके हैं। अभी तक पठन पाठन व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाया है। चालू सत्र में जुलाई महीने तक छात्र-छात्राओं की प्रवेश प्रक्रिया चली। इसके बाद अगस्त, सितंबर, अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर में कक्षाएं संचालित हुई। छह फरवरी से बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम होने से चालू महीने में ही माध्यमिक स्कूलों में गृह परीक्षा शुरू करा दी गई हैं। चालू महीने में ही परीक्षा पूर्ण करने का साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन और गजट आदि पूरा करने का समय तय है।
माध्यमिक स्कूलों में कक्षा छह, सात, आठ, नौ और 11 की वार्षिक परीक्षाएं कुछ जगह शुरू हो गई हैं, कुछ जगह शुरू होने वाली हैं। खास बात तो यह है कि शासन से तय शैक्षिक कलेंडर के तहत अभी तक 70 प्रतिशत कोर्स ही पूरा हो पाया है। ऐसे में अधूरी पढ़ाई से परीक्षा देने वाले बच्चों को आगे कक्षाओं की पढ़ाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं अभिभावकों का कहना है कि स्कूल बंद हो जाने से मार्च तक बच्चे इधर-उधर घूमेंगे। पहली अप्रैल से सत्र भले ही प्रारंभ करने का समय तय है, लेकिन जून के पहले पाठ्य पुस्तकें ही बाजार में नहीं आती हैं। डीआईओएस महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि बोर्ड परीक्षा और उसके बाद मूल्यांकन की प्रक्रिया होने के कारण गृह परीक्षा बोर्ड परीक्षा के पहले संपन्न कराना मजबूरी है।
-शैक्षिक कलेंडर के अनुरूप 70 प्रतिशत ही हुई पढ़ाई