फतेहपुर। ठंड का मौसम अस्थमा मरीजों के लिए घातक साबित हो रहा है। जिला अस्पताल में 21 अक्तूबर से 20 दिसंबर तक 12 दमा मरीजों की मौत हुई है। वहीं सामान्य मौसम में ऐसे मरीजों की मौत का आंकड़ा औसतन एक से दो रहता है। पैरालिसिस से भी दो माह में 3 मरीजों की मौत हुई है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि ठंड बढ़ने से अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। यहां रोजाना लगभग 30 से 35 दमा मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बताया कि अस्थमा एक एलर्जिक बीमारी है। ठंड में सांस नली सिकुड़ने और स्मॉग बढ़ने से मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है। सांस नली में सूजन या म्यूकस (बलगम) जमा होने से मौत का खतरा बढ़ जाता है। अस्थमा का इलाज सही से न हुआ तो यह सीओपीडी (फेफड़ों की गंभीर बीमारी) का रूप ले लेती है। बीमारी से बचाव के लिए कोहरे या स्मॉग के बीच घर से बाहर निकलना घातक है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर एनके सक्सेना ने बताया कि ठंड में पैरालिसिस की समस्या भी बढ़ी है। दिसंबर माह में अब तक करीब 20 मरीज जिला अस्पताल आ चुके हैं। ठंड में नसें सिकुड़ने से दिमाग में खून की रुकावट या कम पहुंचने से दिक्कत होती है। ठंड से बचाव ही इसका बेहतर इलाज है।