अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जिले के सात निकाय के चुनाव में राजनैतिक पार्टियों को अपनों के विरोध से भी दो-चार होना पड़ा। सदर सीट पर कांग्रेस को करारा झटका लगा। बहुआ में तो भाजपा से टिकट न मिलने पर विद्रोही बने निर्दल प्रत्याशी ने कब्र खोदने का काम किया। हथगाम व जहानाबाद में भी ऐसा ही हुआ। जहानाबाद में ऐसा कुछ नहीं हुआ, लेकिन हथगाम में थोड़ा ही सही लेकिन बसपा को झटका जरूर लगा।
सदर सीट से कांग्रेस के युवा नेता स्वरूप राज सिंह जूली अपनी पत्नी दीपिका सिंह के लिए टिकट मांग रहे थे। टिकट न मिलने पर दीपिका को निर्दल मैदान में उतार दिया। कांग्रेस ने अर्चना गुप्ता को टिकट दिया था। अर्चना को 6679 मत मिले जबकि दीपिका 6935 वोट झटकने में सफल रहीं।
बहुआ में भाजपा ने निवर्तमान अध्यक्ष के पति बिजेंद्र सिंह को टिकट दिया था, जबकि इस बार चुनाव जीते राजेश गौतम का नाम लखनऊ तक जा चुका था। ऐन वक्त पर टिकट कटने पर ये निर्दल चुनाव लड़े। अरुण भी भाजपा की राजनीति करते हैं। यह भी चुनाव मेें कूद पड़े। अरुण को 316 वोट मिले।
राजेश को 1527 वोट मिले, जबकि बिजेंद्र 1210 मत पर सिमट गए। जहानाबाद में पूर्व चेयरमैन हाफिज अनवारूल हक पत्नी राबिया खानम को लड़ाना चाहते थे। टिकट न मिलने पर कांग्रेस ज्वाइन कर चुनाव लड़ाया। इस पर बसपा ने इन्हें पार्टी से भी निकाल दिया था। यहां बसपा की राबिया खातून 2946 मत के साथ विजयी होने में कामयाब रहीं। कांग्रेस प्रत्याशी ने 2522 वोट झटके।
इस लिहाज से बसपा को यहां पर विद्रोही प्रत्याशी से जूझते हुए जीत हासिल करनी पड़ी। हथगाम में भी बसपा से ही विद्रोही उम्मीदवार सामने आया। बसपा ने मनोरमा को टिकट दिया था। सत्यजीत टिकट मांग रहे थे। टिकट कटने पर यह निर्दल कूद पड़े। जिस पर पार्टी ने इन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
इस चुनाव में बसपा प्रत्याशी मनोरमा को 223 को मत मिले जबकि सत्यजीत को 569। हालांकि इन दोनों मतों को जोड़ने पर भी जीते प्रत्याशी फूल सिंह से काफी पीछे रही। बिंदकी व किशनपुर में किसी पार्टी के सामने विद्रोही तो नहीं उतरे। अलबत्ता यह भी समीकरण बिगाड़ने में पीछे नहीं रहे।
बसपा के जिलाध्यक्ष सीताराम गौतम का कहना है कि विद्रोहियों को बसपा सुप्रीमो के फरमान पर पहले ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। जो अंदरखाने चुनाव मेें पार्टी प्रत्याशियों की जीत पर रोड़ा बने। उनकी भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमरनाथ सिंह अनिल का कहना है कि हाईकमान ने प्रत्याशियों से विद्रोही कांग्रेसियों के नाम मांगे हैं। यकीनन जूली के चुनाव से पार्टी का चुनाव प्रभावित हुआ, लेकिन प्रत्याशी के समाज से भी अच्छा सहयोग नहीं मिला। यह भी हार का एक कारण रहा है। भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश बाजपेई कहते हैं कि क्या खोया क्या पाया। इस पर आगे समीक्षा होनी है। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
बागी बनकर खोदी कब्र
सदर में कांग्रेस की निर्दल प्रत्याशी ने बिगाड़ा गणित
बहुआ व हथगाम में भी यही थी नौबत