अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। मवईधाम में चल रहे सर्व धर्म, सर्वजातीय सामूहिक विवाह उत्सव व विश्व महायज्ञ के चौथे दिन स्वामी परमानंद ने प्रवचन दिया। कालिंदी के तट पर महायज्ञ स्थल पर हवन की आहुतियां डाली और परिक्रमा की। भक्तों ने महराज परमानंद के दर्शन भी किए।
स्वामी परमानंद ने कहा कि पशु नासमझ होते हुए भी मनुष्यों से अधिक समझदारी के काम करता है। उन्होंने कहा कि पशु केवल ऋतु गामी होता है, उसको कामवासना एक निश्चित समय पर सताती है। वह सृष्टि के संचालन का कार्य करता है, लेकिन मनुष्य ऋतुगामी न होकर भार्यागामी होता है, जबकि मनुष्य को सृष्टि संचालन आर्तऋतु गामी होना चाहिए। इंसान को अपनी ऊर्जा व्यर्थ में नष्ट नहीं करनी चाहिए।
शास्त्र व धर्म के अनुकूल काम करना ही परमात्मा का स्वरूप है। जम्मू के श्रीमद्भागवत कथावाचक संत सुभाष शास्त्री ने कथा में कहा कि ‘सकल शो दायक अभिमाना’ अर्थात अभिमान से ही सारे कष्ट होते हैं। व्यक्ति के अंदर स्वाभिमान होना चाहिए, अभिमान नहीं। अभिमान की वजह से ही अर्जुन की भीलों के द्वारा मृत्यु हुई। दुर्योधन के अभिमान से ही कौरव वंश का विनाश हुआ।
इस मौके पर अखंड परमानंद धाम के संरक्षक स्वामी ज्यार्तिमयानंद, स्वामी हरिद्वार सिद्ध स्वरूप, स्वामी ध्यानानंद महराज, स्वामी गुरुशरणानंद महराज, स्वामी साध्वी दिव्य चेतना, स्वामी सत्यप्रकाश, स्वामी चेतनानंद, अमेरिका की साध्वी बेवर्ली, स्वामी परमप्रकाश, बिंदकी विधायक करण सिंह पटेल पूर्व विधायक जहानाबाद मदनगोपाल वर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता राजीव शुक्ला हमीरपुर मौजूद रहे।