फर्रुखाबाद। झारखंड के जामताड़ा और हरियाणा के नूंह जिले की तरह राजेपुर क्षेत्र के गए गांवों में साइबर ठगी का कारोबार फल-फूल रहा है। बागपत पुलिस ने जिले के दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। वह उच्च शिक्षा हासिल करने गए थे, मगर साइबर ठगी को व्यवसाय बना लिया। इसकी खासी चर्चा रही। हालांकि गिरोह का सरगना पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। जानकारों के पकड़े गए साइबर ठगों पर हथियार बरामद होने की बात गले नहीं उतर रही है। बागपत पुलिस ने साइबर ठगी के मामले में राजेपुर थाना क्षेत्र के तुसौर निवासी प्रधान गीता देवी के पुत्र अंकुर सिंह, गांव के ही पुष्पेंद्र सिंह के पुत्र आकाश उर्फ अतुल और अमृतपुर थाने के गांव पिथनापुर निवासी उत्कर्ष प्रताप सिंह को साइबर ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। इनके साथ गिरोह के पांच अन्य साथी भी पकड़े गए हैं। इन साइबर ठगों पर एक प्राथमिकी भी दर्ज की है। यह युवक बीबीए करने के बाद परिवार के लोगों ने एमबीए करने के लिए भेजा था। इन युवकों ने वहां पहुंचकर शाही शौक पाल लिए। परिवार के लोग समझ नहीं पाए। बताया जाता है कि क्षेत्र का ही पुलिस की पकड़ से दूर एक शातिर युवक ने इन्हें कारोबार से जोड़ा। उसी के इशारे पर युवकों ने ठगी का काम शुरू कर दिया। आरोपियों ने जस्ट डायल प्लेटफॉर्म पर ग्रोसरी और सॉफ्ट ड्रिंक के फर्जी विज्ञापन पोस्ट कर लोगों को आकर्षित किया। ऑर्डर के नाम पर लोगों से ऑनलाइन भुगतान कराकर सामान नहीं भेजा। बताते हैं कि पकड़े गए जिले के तीनों युवकों के खातों से भी लेन-देन हुआ है। सूत्र बताते हैं कि जो युवक साइबर ठगी का कारोबार करते हैं, वह हथियार नहीं रखते। क्योंकि इनका अपराध हथियारों से नहीं लैपटॉप व मोबाइल से चलता है। बहरहाल युवकों की करतूत से परिवार के लोग खासे परेशान हैं।