मोहर्रम के यौम-ए-आशूरा पर जज्बा और अकीदत का सैलाब कर्बला के शहीदों की याद में रमा दिखा। मातमी दस्तों के बदन से रिसता खून, काला लिबास, नंगे पैर और जुबां पर हुसैन का नाम रहा।
हालों के हरे-भरे ताजियों का प्रदर्शन कर पर्यावरण प्रदूषण उन्मूलन का पैगाम दिया गया। कर्बला में भारी हुजूम के बीच ताजिए सुपुर्द-ए-खाक किए गए। यह मंजर शहर में ही नहीं पूरे जिले में दिखा।
शनिवार को मुसलमानों ने कर्बला के 72 शहीदों को याद कर अकीदत पेश की। सुबह होते ही आज हमारा इमाम जुदा हो गया, अल्लाहु अकबर और या हुसैन की सदाओं के बीच ताजिए कर्बला पहुंचने लगे।
ताजियों की जियारत के लिए महिलाओं ने कर्बला जाने वाले रास्ते पर बने मकानों की छतों और पटियों पर डेरा डाल लिया। सबसे पहले गागर लेकर शाह फसीह मुजीबी कर्बला पहुंचे और इमाम हुसैन को अकीदत पेश की।
मोहल्ला भीकमपुरा से लाल मोहम्मद, शहजाद अंसारी, शकील व रईस के अलावा तकिया नसरत शाह से अशफाक अंसारी की हालों के हरे-भरे ताजिए जुलूस कर्बला पहुंचे।
इस दौरान अल्लाहु अकबर और या हुसैन के नारे गूंजते रहे। मोहल्ला दिलावरजंग से पप्पनमियां की अगुवाई में ताजिया जुलूस निकाला गया। मोहल्ला गढ़ी अब्दुल मजीद, मोहल्ला नखास से जरदोजी के ताजिए जुलूस की शक्ल में कर्बला पहुंचे। ठंडी सड़क स्थित दरे जैनबिया से उठे अलम जुलूस की जियारत को लोग लालायित रहे।
जंजीरों और कमा के मातम के साथ शिया समुदाय का जुलूस निकला। मातमी दस्तों ने शमसीर का मातम कर खून बहाया। काला लिबास, नंगे पैर, बदन से रिसता खून के बीच अकीदतमंद या हुसैन और अली मौला के नारे लगाते रहे।
इस अवसर पर मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली, सैयद आफताब हुसैन, मुम्मताज हुसैन, नफीस हुसैन, सलीम हैदर, नावेद अल्वी, नादर हुसैन, मुख्तार टेनी, ताहिर हुसैन, असलम शेर खां, मोहम्मद हसीन, शराफत खां भोले, खुर्शीद अहमद, जुबैर अंसारी, नासिर अली, हाजी वारिस अली, काजी मुताहिर अली और आमिर सबरी आदि मौजूद रहे।
वहीं हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी की याद में दसवीं मोहर्रम में फतेहगढ़ नगर में अलम और ताजिया निकाले गए। दरगाह सत्तारिया से ताजिया उठकर मिलिट्री चौराहा पहुंचा। इसके बाद कर्बला में ताजियों को सुपुर्द ए खाक किया गया।
मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष शमशाद अहमद की देखरेख में फतेहगढ़ नगर में शनिवार को दरगाह सत्तारिया से ताजिया और अलम का जुलूस निकाला गया। जुलूस निकालने के दौरान फतेहगढ़ कोतवाली से चौराहा तक सड़क क्रास करने वाले बिजली के तारों को विभागीय कर्मचारियों ने नहीं हटाया।
इस कारण ताजियों को उठाकर चलने में अड़चन आने लगी। अनसुनी किए जाने पर कमेटी के लोग विभागीय अधिकारियों के विरोध में कोतवाली के पास जमीन पर बैठ गए। इसकी जानकारी मिलने पर एक्सईएन शहर एसके शर्मा ने अवर अभियंता को भेज कर सड़क क्रास करने वाले तारों को आनन फानन में कटवा दिया।
इसके बाद ताजिया और अलम कोतवाली कानपुर मार्ग होते हुए मिलिट्री चौराहे पर पहुंचे, यहां पर कर्नलगंज, शीशमबाग, सोताबहादुर से आए ताजिया और अलम एकत्र हुए। यहां ताजियों को सुपुर्द ए खाक किया गया।
अध्यक्ष ने बताया कि 15 ताजिया और 32 अलम उठाए गए थे। इस दौरान नसीम अहमद, मिर्जा हसन अशरफ, रइस हैदर अच्छे, मोहम्मद जैद, निराजुुद्दीन, कमर अब्बासी, शकील, छोटे मौजूद रहे।
नवाबगंज प्रतिनिधि के अनुसार मोहर्रम पर्व पर शाही मस्जिद से अलम जुलूस निकाला गया। जुलूस कर्बला पहुंचा, यहां पर ताजिए सुपुर्द-ए-खाक कर दिए गए। जुलूस के दौरान शैदाइयों ने हैरत अंगेज करतब दिखाए। इस अवसर पर इदरीश, अफसार खां, शमसुद्दीन, इम्त्यिाज खां, अमानतउल्ला और कल्लू खां आदि मौजूद रहे।