फर्रुखाबाद। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) योजना लगभग डेढ़ साल से बंद चल रही है। जिले के 567 समूहों से जुड़ीं करीब 5670 महिलाएं योजना शुरू होने का इंतजार कर रही हैं।
यही नहीं नौ माह से कार्यालय के कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिला है। उच्चाधिकारियों का कहना है कि जल्द ही एनयूएलएम 2.0 चालू होने जा रही है।
वर्ष 2013-14 में शहरी गरीबों के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य था शहरी गरीब महिलाओं को रोजगार दिलाना। समूह का गठन कर महिलाओं को अगरबत्ती, मोमबत्ती, धूपबत्ती निर्माण व खिलौने आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद उन्हें बैंकों से सस्ते ब्याज दर पर लोन दिलाकर उन्हें रोजगार स्थापित करने में मदद की जाती है।
वर्ष 2024 तक जिले में करीब 567 महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए गए। प्रत्येक समूह में कम से कम दस महिलाओं को जोड़ा जाता है। यानी लगभग 5670 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। मगर सितंबर 2024 में एनयूएलएम योजना बंद होने से स्वयं सहायता से जुड़ी महिलाएं रोजगार को आगे नहीं ले जा पा रही हैं, क्योंकि उन्हें सस्ते ब्याज दर पर लोन नहीं मिल पा रहा है। समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि योजना बंद होने से बैंकों से ऋण नहीं मिल पा रहा, जिससे कच्चा माल नहीं खरीद पातीं।
प्रभारी परियोजना अधिकारी गजराज सिंह ने बताया कि शासन से ही योजना बंद चल रही है। जो समूह गठित हैं, वे काम कर रहे होंगे। जल्द ही एनयूएलएम 2.0 शुरू होने की उम्मीद है। कार्यालय के कर्मचारियों की उपस्थिति भी शासन को भेजी जा रही है।