फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहर में सुलभ शौचालय न होने से महिलाएं हो रहीं शर्मसार

Sun, 03 Apr 2016 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
विज्ञापन
शौचालय के बाहर पशु बांधने के लिए गढ़ाए गए खूंटे - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
खुले में शौच का जितना का बुरा हाल गांवों में है,  शहरी क्षेत्रों में भी हालात कम बदतर नहीं हैं। सरकार गांवों में शौचालय निर्माण पर पूरा जोर दे रही है, लेकिन शहरी इलाकों में कोई ठोस नीति न होने से सार्वजनिक व सुलभ शौचालय की कमी हर किसी को परेशान करती है। खासकर बाजार गई महिलाओं को यह कमी ज्यादा अखरती है। शहर की घनी आबादी के बीच बाजारों में महिलाओं को आए दिन इस परेशानी से दो चार होना पड़ता है।
विज्ञापन


जहां कहीं सुलभ शौचालय हैं भी, वहां सफाई व्यवस्था न होने से नर्क जैसी स्थिति है। हाल यह है कि कई जगह सुलभ शौचालय खंडहर में तब्दील हो गए हैं। सिविल लाइंस में लोग खिड़की दरवाजे तक निकाल ले गए हैं। यहां मोहल्ले वाले अपने पशु बांध रहे हैं। सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि शहरी क्षेत्रों में इस समस्या के समाधान की बात न तो कोई जनप्रतिनिधि कर रहा है और न ही कोई समाजसेवी।

वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में विजयी हुए अनंत कुमार मिश्र ने सिविल लाइंस में एक सुलभ शौचालय का निर्माण कराया था। इस सुलभ शौचालय को 2009 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार ने लोकापर्ण कर जनता को समर्पित किया था। बसपा सरकार के जाते ही इस सुलभ शौचालय के खिड़की दरवाजे लोग निकाल ले गए और पानी की टंकी और पाइप लाइनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
विज्ञापन


मौजूदा समय में यहां मोहल्ले वाले अपने-अपने पशु बांध रहे हैं। इसी तरह प्रदेश सरकार में मंत्री रहे गोपीनाथ दीक्षित ने 1989 को एमआईसी स्कूल के सामने गंगा कार्य योजना के तहत सुलभ शौचालय का लोकापर्ण किया था। धीरे-धीरे यह शौचालय भी खंडहर में तब्दील हो गया। फर्रुखाबाद चौक पर कई दशक पहले बने सुलभ शौचालय पर दबंगो ने कब्जा कर लिया और वहां दुकान का निर्माण करा दिया। मौजूदा समय में सुलभ शौचालय के स्थान पर दुकान चल रही है। इसी तरह सराय में बनाया गया सुलभ शौचालय भी खंडहर में तब्दील हो रहा है। शहर क्षेत्र में बाहर से आने वाली महिलाओं को लघुशंका व दीर्घशंका करने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कभी भी धराशायी हो सकता खंडहर
एमआईसी कालेज के सामने खंडहर में तब्दील हुए सार्वजनिक शौचालय के संबंध में सफाई कर्मचारी सुनील निवासी ग्वालटोली बताता है कि किसी समय यह खंडहर जमींदोज हो सकता है। इस संबंध में कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई।

महिलाओं का दर्द नहीं समझ रहे नेता
एक तरफ केंद्र सरकार खुले में शौच न करने की हिदायत देकर गांवों में शौचालयों का निर्माण करा रही है। वहीं दूसरी तरफ शहर क्षेत्र में रह रहीं महिलाओं की समस्या के समाधान के लिए न तो कोई बाथरूम बनवा रही है और न ही शौचालय बनवाए जा रहे हैं।-सपना तिवारी, मोहल्ला नुनहाई

बाहर से आने वाली महिलाओं को होती भारी परेशानी
महिलाएं जब मार्केट में जाती हैं और उन्हें लघुशंका लगती है तो उन्हें मजबूरी में शर्मसार होकर खुले में ही लघुशंका करने को मजबूर होना पड़ता है। महिलाओं की इस विषम समस्या के समाधान की आवाज कोई नहीं उठा रहा है। बाहर से आने वाली महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। शालिनी तिवारी, मोहल्ला शाहजी नुनहाई।  

महिला होने के नाते समझतीं दर्द
खुद महिला होने के नाते महिलाओं का दर्द अच्छी तरह से जानती हूं। फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ युग्म नगरों में महिलाओं की इस विषम समस्या के समाधान के लिए शौचालय बनाने के लिए 20 स्थान चिह्नित किए गए हैं और इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। वहां स्वीकृति मिलते ही शौचालयों का निर्माण करा दिया जाएगा। - वत्सला अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष फर्रुखाबाद।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें