रोते बिलखते राहुल और रुकमणी के परिजन।
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थाना जहानगंज के गांव रठौरा मोहद्दीनपुर में चार दिन के भीतर पति-पत्नी व बेटी की मौत हो गई। इससे इलाके में हलचल मची है। सबसे दुखद तो यह है कि इस परिवार के पास मात्र एक बीघा जमीन थी, जिसे बेचकर पुत्रवधू को बचाने का प्रयास किया लेकिन पुत्रवधू ने भी दम तोड़ दिया।
गांव रठौरा मोहद्दीनपुर निवासी दरबारीलाल (57) की तबीयत नौ सितंबर को खराब हो गई। उनके दामाद कायमगंज निवासी जितेंद्र ने अपने ससुर को मेजर एसडी सिंह मेडिकल कालेज नाला बघार में भर्ती कराया। जहां तीन दिन उपचार के बाद 11 सितंबर को उसे रेफर कर दिय ागया। इस पर जितेंद्र दरबारी लाल को कानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
पिता के गंभीर रूप से बीमार होने की जानकारी मिलने पर सिरसागंज स्थित शीतगृह में नौकरी करने वाला दरबारी लाल का बेटा राहुल (30) घर पहुंचा। वह पिता के इलाज के लिए पैसे के इंतजाम में लग गया। जितेंद्र के मुताबिक राहुल पैसे के लिए अपनी ससुराल कन्नौज गया और वहां से कानपुर आ रहा था कि कल्याणपुर रेलवे स्टेशन के पास हृदयगति रुकने से उसकी मौत हो गई।
जितेंद्र राहुला का शव और बीमार दरबारी लाल को लेकर 11 सितंबर को देर रात रठौरा मोहद्दीनपुर पहुंचा। इस दौरान मायके में रह रही राहुल की पत्नी रुक्मिणी भी अपनी ससुराल पहुंच गई। रुक्मिणी गर्भवती थी। अपने पति की मौत का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सकी। नतीजतन उसकी हालत बिगड़ गई।
12 सितंबर को उसे एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां 13 सितंबर को उसने बेटी को जन्म दिया। यहां डाक्टरों ने रुक्मिणी का गुर्दा प्रभाति होने की जानकारी दी। इस पर बीमार दरबारीलाल ने बहू को बचाने के लिए एक बीघा खेत भी बेच दिया।
15 सितंबर को चिकित्सक के रेफर कर करने पर परिजन रुक्मिणी को कानपुर ले जा रहे थे कि रास्ते में गुरसहायगंज के पास उसने दम तोड दिया। कुछ देर बाद उसकी नवजात बच्ची की भी मौत हो गई। दोनों के शव देर रात गांव रठौरा मोहद्दीनपुर लाए गए। 16 सितंबर को मां-बेटी का एकसाथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।