भागीरथी की अविरल भक्ति और भगवान राम की मर्यादा को हृदय में रखते हुए संत
महात्मा ज्ञानोपदेश के साथ परमार्थ में जुटे हैं। आस्था की बयार से ओतप्रोत
भक्तधार्मिक अनुष्ठानों को पूर्ण करने में रात-दिन लगे हैं। चारों ओर
बिखरी अनुपम छटा से स्नानार्थियों के साथ यहां से गुजरने वाला हर कोई शख्स
अद्भुत नजारा देखने के लिए ठिठके बिना नहीं रह सकता है। गंगा की स्वच्छता
और पवित्रता के साथ गौ माता की रक्षा के संकल्प लिए जा रहे हैं। गंगा में
जलस्तर बढ़ने के चलते 23 घाट पानी में डूब गए हैं।
यहां बनी पुलिस चौकी के
भीतर भी पानी घुस गया है। प्रशासनिक क्षेत्र के सांस्कृतिक पांडाल में
मंगलवार को हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने हास्य, श्रृंगार और ओज की
कविताएं पढ़कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विज्ञान क्विज प्रतियोगिता में
जिले के कई कालेजों के बच्चों ने प्रतिभाग किया। पत्रकार सम्मेलन में
वरिष्ठ कलमकारों को जिलाधिकारी ने सम्मानित किया। वहीं प्रशासनिक अव्यवस्था
से अभ्यस्थ हुए लोगों ने शिकायतें करना बंद कर दी हैं। गंगा-जमुनी तहजीब
के चलते मेला क्षेत्र में हर धर्म के लोग यहां भ्रमण करने के लिए आ रहे
हैं।
बच्चों ने दिखाई प्रतिभा
मेला
सांस्कृतिक पांडाल में विज्ञान क्विज का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में
राजकीय इंटर कालेज, मदन मोहन कनौडिया बालिका इंटर कालेज, सरस्वती विद्या
मंदिर इंटर कालेज, सीपी विद्या निकेतन इंटर कालेज कायमगंज, कृष्णा बालिका
इंटर कालेज फर्रुखाबाद और
राजकीय बालक इंटर कालेज फतेहगढ़ के
छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं की छह टीमें
सुरसरि, भागीरथी, देवनदी, देवापगा, सुरसरिता और जाह्नवी बनाई गईं।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान देवनदी, द्वितीय स्थान जाहनवी और तृतीय स्थान
देवापगा को मिला। विजेता टीम के छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया।
इस अवसर पर नीरज सक्सेना, नेहा सक्सेना, रामलखन सिंह पाल और वेदप्रकाश
मिश्र आदि मौजूद रहे।
दुकानदार को पीटा
शमसाबाद। ढाईघाट पर
लगे माघ मेला में अज्ञात हमलावरों ने दुकानदार को पीट दिया। गांव लाड़मपुर
दोयम निवासी ज्ञानचंद्र ने ढाईघाट पर मिठाई की दुकान और चाऊमीन की ठेली
लगाई है। ज्ञानचंद्र ने बताया कि बीती रात करीब चार-पांच लड़के उनकी चाऊमीन
की ठेली पर आए और चाऊमीन खाई। पैसे मांगने पर हमलावरों ने उन्हें पीटना
शुरू कर दिया। बचाने आए उनके पुत्र रामू को भी पीटा। यही नहीं तोड़फोड़ भी
कर दी।
योग शिविर लगा
आर्य
उप प्रतिनिधि सभा के चरित्र निर्माण शिविर में बुधवार को योग शिविर का
आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों को योग के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखने
के गुर बताए गए। कानपुर से आए धर्मदेव चतुर्वेदी ने यज्ञ में आहुतियां
डलवाईं। इस अवसर पर राजदेव, जयमुनि, दीपक आर्य, रामचंद्र, संदीप आर्य,
राजकुमार, राकेश आर्य, उदिता, वरुन आर्य, रामू आर्य और देवदत्त आर्य आदि
मौजूद रहे।
भगवान नहीं रखता किसी का अभिमान
कथा
वाचक साध्वी मीनू मिश्रा ने नारद प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि समुद्र
मंथन से विश्व मोहिनी निकलीं। उन्हें देखकर वह मोहित हो गए। श्री हरि के
अनन्य भक्त नारद का मोहित होना कोई कारण ही था। वह कहती हैं कि नारद को
अभिमान हो गया था। उनके अभिमान को तोड़ने के लिए भगवान विष्णु ने ऐसी माया
रची कि वह मोह के पाश में बंध गए। विश्वमोहिनी से विवाह के लिए
जब नारद
भगवान मायापति के पास पहुंचे तो भगवान समझ गए कि मेरी ही माया से ही नारद
मोहित हैं। नारद ने श्री हरि से हरिरूप मांगा तो भगवान ने उन्हें हरि
(बंदर) का रूप दे दिया। स्वयंवर में जब नारद पहुंचे तो वहां देवगण और भगवान
के द्वारपाल जय और विजय देखकर मुस्कुराने लगे। स्वयंवर तो श्री हरि के साथ
होने के पश्चात जब नारद को अपने चेहरे की असलियत की
जानकारी हुई तो
उन्होंने जय, विजय को राक्षस होने का श्राप दे दिया। यही जय-विजय रावण और
कुंभकरण बने। भगवान भक्त के अभिमान को कभी नहीं रखता। दंभ मनुष्य के पतन का
कारण बनता है। इसलिए अभिमान नहीं करना चाहिए। नारद से जब माया हटी तो
उन्हें ज्ञात हुआ और श्री हरि पर किए आरोपों पर उन्होंने पश्चाताप किया।
गौ पूजन किया गया
जहां
एक ओर भक्त गंगा की स्वच्छता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए संकल्प ले
रहे हैं। वहीं उन्हें गौ माता की रक्षा के लिए भी संकल्प दिलाया जा रहा है।
मेले में गायों की जगह-जगह पूजा की जा रही है।
जलस्तर बढ़ने से झोपड़ियों में घुसा पानी
नरौरा
बांध से छोड़े जाने वाले पानी के चलते गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
इससे पश्चिम, उत्तर क्षेत्र के 23 घाट डूब गए हैं। कल्पवासी अन्यंत्र
स्थानों पर जाने को विवश हैं। यहां बनी चौकी भी डूबने की कगार पर है।
रामनगरिया समाप्त होने में महज एक सप्ताह ही शेष रह गया है।
घाट जस के तस, सीढ़ी टूटी
रामनगरिया
क्षेत्र में आने-जाने वाले लोगों के लिए सीढ़ियां बनवाने का फरमान जारी
हुआ था। लेकिन घाटों की स्थिति अब भी जस की तस है। सीढ़ियां अभी भी टूटी
पड़ी हैं। टूटी सीढ़ियों से ही लोग आवागमन कर रहे हैं। कई लोग सीढ़ियों से
गिरकर चुटहिल भी हो चुके हैं।