फर्रुखाबाद। मौसम के तेवर बदल गए हैं। अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। न्यूनतम पारा भी नौ डिग्री सेल्सियस से ऊपर है। फसलों के लिए न्यूनतम चार से पांच और अधिकतम 18 से 19 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत है। मौसम का मौजूदा मिजाज रबी की फसलों के लिए मुफीद नहीं है। कृषि वैज्ञानिक भी इसकी तस्दीक करते हैं। मौसम में गर्मी बरकरार रही तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में किसानों को खेतों में नमी बरकरार रखने की जरूरत है।
आलू पर नहीं पड़ेगा फर्क
आलू की फसल पक कर तैयार हो रही है। किसान खुदाई भी करने लगे हैं। फरवरी के पहले सप्ताह में शीतगृहाें में भंडारण भी शुरू हो जाएगा। इससे बदले मौसम का आलू पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सरसों में सा फ्लाई का हो सकता आक्रमण
फसल में परागण तकरीबन पूरा होने की स्थिति में है। इससे दाने बनने लगे हैं। ऊंचे तापमान से पत्तियाें में सा फ्लाई का आक्रमण हो सकता है। यह पत्तियाें को नुकसान पहुंचाता है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
गेहूं में नुकसान की ज्यादा आशंका
मौसम के बदले तेवराें से गेहूं में नुकसान की सबसे ज्यादा आशंका है। फसल को बचाए रखने के लिए किसान खेत में नमी बनाए रखें। फसल सूखने से पहले सिंचाई करते रहें।
तंबाकू में काली सूड़ी के प्रकोप का खतरा
तंबाकू की फसल में काली सूड़ी के प्रकोप का अंदेशा है। यह पत्तियाें को नुकसान पहुंचाती है। किसान फसल में सिंचाई करते रहें। पानी जमा न होने दें। फसलों में सिंचाई करें।
दलहन में हरी सूड़ी लग सकती
चना, मटर व अरहर में हरी सूड़ी लग सकती है। यह फसल में तेजी से नुकसान करती है। इससे उत्पादन प्रभावित होता है। किसान सूड़ी से बचने के लिए थेरोमैन ट्रेप विधि का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मौसम में बढ़ी गर्मी आलू के अलावा किसी भी फसल के लिए फायदेमंद नहीं है। इससे रबी की फसलाें का उत्पादन प्रभावित होगा। किसान खेतों में नमी बनाए रखने के लिए सिंचाई करते रहे। - डा. जगदीश किशोर, कृषि वैज्ञानिक