विकास खंड बढ़पुर क्षेत्र का जसमई-मुरहास कन्हैया बाईपास मार्ग 22 साल से
क्षतिग्रस्त है। यह मार्ग फर्रुखाबाद-बरेली हाईवे पर मिला है। इस मार्ग पर
रोज सैकड़ों चौपहिया-दुपहिया वाहन गुजरते हैं। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे
होने से इस मार्ग से सफर बेहद जोखिम भरा है। बरसात में पानी भर जाता है।
इससे आए दिन दुर्घटनाएं भी होती हैं। जसमई दरवाजा के दुकानदारों की
दुकानदारी पर भी असर पड़ता है। इसके बाद भी जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि
अंजान बने हुए हैं।
जसमई दरवाजा-मुरहास कन्हैया बाईपास मार्ग
बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे को जोड़ता है। इससे दिन भर सैकड़ों ट्रैक्टर, ट्रक
और अन्य चौपहिया वाहन गुजरते हैं। जसमई दरवाजा पर ही बाजार भी है। पचपुखरा,
बाबर नगरा, रामपुर, मालिकपुर समेत करीब एक दर्जन गांव बीच में पड़ते हैं।
इतना महत्वपूर्ण मार्ग होने पर भी 6 किमी. का यह बाईपास मार्ग 22 साल से
ध्वस्त पड़ा है। जसमई दरवाजा, पचपुखरा और रामपुर गांव में सड़क पर
बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इसलिए 6 किमी. की दूरी
तय करने में वाहन चालकों
को एक से डेढ़ घंटा लगता है। मोहम्मदाबाद से आने वाले लोग घूमकर शहर में
प्रवेश करते हैं। ग्रामीण ट्रैक्टरों से आलू व गल्ला आदि लादकर जब इस मार्ग
से गुजरते हैं तो उन्हें काफी दिक्कत उठानी पड़ती है। कई बार तो ट्रैक्टर
और ट्रक पलट भी चुके हैं। खास बात यह कि इसी रूट पर वरिष्ठ सपा नेता
नागेंद्र सिंह शाक्य का आवास भी है।
इसके बाद भी उन्होंने न तो मुख्यमंत्री
और न ही जिले के आला अफसरों से इस मार्ग को बनवाने की मांग की। ग्रामीणों
का कहना है कि प्रधान से लेकर विधायक और सांसद तक से इस मार्ग को बनवाए
जाने की मांग कर चुके हैं लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों ने
जिलाधिकारी से मांग की है कि इस मार्ग का एक बार वह दौरा अवश्य करें। हकीकत
देखें और समस्या से निजात दिलाएं।
वर्जन
जसमई
दरवाजा बाईपास के निर्माण की जिम्मेदारी जिला पंचायत की है। यह मार्ग
सांसद निधि के तहत नहीं आता है। इसका निर्माण कराने के लिए जिला पंचायत को
प्रस्ताव भेजा था। डीएम को भी पत्र भेज कर अवगत कराया था। सड़क निर्माण का
मामला कहां फंसा है, नहीं बता सकते। सड़क निर्माण का प्रस्ताव दोबारा जिला
पंचायत को भेजेंग।
-मुकेश राजपूत, सांसद