गंगा और रामगंगा का जलस्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा हैं। इससे ग्रामीण भयभीत हैं। शनिवार को भी नरौरा बांध से गंगा नदी में करीब डेढ़ लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है। वहीं, करीब 50 गांवों में पानी भरने से लोगों को मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है।
गंगा व रामगंगा दोनों नदियों का जलस्तर अब 136.80 मीटर पर पहुंच गया है। दोनों ही नदियों में खतरे का बिंदु 137.10 मीटर पर है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर से पट्टी भरखा, सैदापुर, कछुआ गाड़ा, भूड़रा, सबलपुर, लायकपुर, जगतपुर, उदयपुर, कुड़री सारंगपुर, करनपुर घाट, फुलहा, जटपुरा, रामप्रसाद नगला आदि समेत करीब 50 गांवों में पानी भर गया है।
मंझा निवासी संतोष कुमार, राजवीर, दिनेश कुमार ने बताया कि गंगा का पानी घरों में भर गया है। खाना बनाने में भी समस्या होती है। जहां सूखा मिलता है, वहां पर चूल्हा रख कर खाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा सुंदरपुर व माखन नगला की ओर जाने वाले रास्ते कट गए हैं। इससे लोगों को निकलने में समस्या हो रही है।
वहीं, रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से अलादपुर भटौली, कोला सोता, बेचेपट्टी, गलार, खाकिन, महोलिया, बेहटा, रेगापुर आदि एक दर्जन गांवों के किनारे पानी पहुंच गया है। पानी अधिक हो जाने से अहलादपुर में रामगंगा का कटान थम गया है। हालांकि कुछ गांवों के किनारे खेतों में कटान अब भी जारी है।
मंझा व राम प्रसाद के नगला में नहीं पहुंची स्वास्थ्य टीम
बाढ़ पीड़ित गांवों में अब बीमारियां फैलने लगी हैं, लेकिन चिकित्सकों की टीम नहीं पहुंची। यहां पर बुखार, जुकाम, उल्टी-दस्त और खुजली से लोग परेशान हैं। सोरन देवी के बच्चे को ज्वाइंडिस हो गया है। उन्हें दवा लेने अमृतपुर सीएचसी जाना पड़ा। वेदवती, रामवती, संतोष कुमार, सत्यपाल, भूरी देवी, अनमोल, आकांक्षा आदि लोग दवा लेने अमृतपुर पहुुंचे। उन्होंने बताया कि दो-दो नाव से नदी पार कर अमृतपुर जाना होता है। गांव में अब तक न कोई डाक्टर आया है, न ही दवाई बांटी गई है। इसके अलावा माखन नगला, रामप्रसाद नगला, जटपुरा कहिलियाई गांव में बीमारी फैली हुई है।
जानवर भी बीमार
बाढ़ प्रभावित गांवों में इंसान ही नहीं जानवरों में भी बीमारियां फैल रही हैं। मंझा निवासी सुरेश चंद्र, छविनाथ, दिनेश कुमार के जानवर मर चुके हैं। खुरपका, मुंहपका की बीमारी फैलने से कई ग्रामीणों के जानवर बीमार हैं। रामप्रसाद नगला में शुक्रवार को पहुंची पशुचिकित्सकों की टीम ने न ही टीकाकरण किया न ही बीमार जानवरों को देखा। श्यामपाल, विजेंद्र ,पप्पू, ज्ञानसिंह, दिवारी लाल आदि ग्रामीणों ने बताया कि गांव में जानवरों में बीमारी फैल रही है। शुक्रवार को पशु चिकित्सा विभाग की गाड़ी से कर्मचारी गांव आए थे, केवल एक ग्रामीण को जानवरों को टीका लगाने वाली वैक्सीन देकर चले गए।
बंद हुआ शरणालय
कंपिल। क्षेत्र के गांव पथरामई में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान भी तेजी से हो रही है। शनिवार को एक चबूतरे पर लगे दो हरे पेड़ भी कटान से गिर गए। गांव में चारों ओर पानी भर जाने से लोगों के पास खाना बनाने तक की जगह नहीं बची। ग्रामीण पलायन कर रहे हैं। दूसरी ओर तीन दिन पूर्व गंगा में पानी कम होने पर गांव के विद्यालय में खोले गए शरणालय को बंद कर दिया गया था। अब फिर से गांव में पानी भर गया है, इसके बावजूद शरणालय शुरू नहीं किया गया है।
गांव पथरामई के ग्रामीण बाढ़ के कारण इधर-उधर भटक रहे हैं। शनिवार को कई परिवार गांव से निकल कर रिश्तेदारी आदि में चले गए। वहीं, काननूगो मुरारी लाल ने कुछ ग्रामीणों के रहने की व्यवस्था हमीरपुर मजरा जात गांव के पास पड़ी पथरामई ग्राम समाज की जमीन पर की है। ग्रामीणों ने बताया करीब दस दिन पहले जिलाधिकारी मोनिका रानी ने गांव का दौरा किया था। उनके निर्देश पर गांव के विद्यालय में बाढ़ शरणालय खोला गया था। दो दिन बाद पानी कम होने पर शरणालय बंद कर दिया गया। अब फिर से गांव में पानी भर गया है। लेकिन शरणालय में न रहने की व्यवस्था की जा रही है, न ही खाने की। पिंटू मिश्रा, जयसिंह, बृजेंद्र, धनसिंह, विनोद, बबलू, श्यामाचरण, नन्हें यादराम आदि ने बताया कि पानी ज्यादा है। घरों से सामान भी नहीं निकाल पा रहे हैं। सब कुछ घरों में रखा है। ब्यूरो