अमृतपुर। गंगा का जलस्तर लगातार घटने-बढ़ने से बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की चिंता कम नहीं हो रही है। जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की कमी हुई है। नरौरा बांध से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है। बाढ़ से तहसील क्षेत्र के 40 गांव प्रभावित हैं। कई गांवों में घरों के अंदर पानी भरा होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक पशुओं के चारे की समस्या है।
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है लेकिन यह नाकाफी है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी तरह परिवार का पेट भरने की व्यवस्था हो जाती है लेकिन पशुओं के लिए चारा जुटाना मुश्किल है। वे सुबह ही नाव और पानी से होकर घास लेने निकल जाते हैं और दोपहर तक वापस आते हैं। शौचालय डूब जाने से महिलाओं व बुजुर्गों के सामने काफी समस्या है। गांवों में पानी भरने से घरों के आसपास शौच जाने की जगह नहीं है। ऐसे में नाव से मुख्य मार्ग तक पहुंचने के बाद ग्रामीणों को काफी दूर शौच के लिए जाना पड़ रहा है।
अंबरपुर की मड़ैया निवासी मुरारी लाल, दलवीर और रामसेवक ने बताया कि घरों में पानी भर गया है। कई परिवारों के सामने खाना बनाने तक की जगह नहीं बची है। बाढ़ का पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं। बुधवार को नरौरा बांध से गंगा में 1,24,173 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलस्तर 137.05 से घटकर 137.00 मीटर पर पहुंचा गया। खतरे का निशान 137.10 मीटर है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से महज 10 सेंटीमीटर नीचे है। रामगंगा का जलस्तर फिलहाल बिलोगेज पर है। खो-हरेली रामनगर बैराज से 2,645 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।