जिले की स्वास्थ्य सेवाएं गरीबों के लिए मजाक बनी हुई हैं। विजन सेंटर
(नेत्र परीक्षण केंद्र ) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बरौन में चल रहा है और
उपकरण शहर के सिविल अस्पताल लिंजीगंज में हैं। यह स्थिति तकरीबन पांच साल
से है। स्वास्थ्य महकमे के सबसे बड़े अधिकारी सीएमओ डा. राकेश कुमार को इस
बावत कुछ पता ही नहीं है।
जिले में चार सरकारी अस्पतालों में विजन
सेंटर खोले गए हैं। इनमें बरौन, राजेपुर, कमालगंज व कायमगंज शामिल हैं।
इनके लिए लाखों रुपये खर्च कर टोनोमीटर,आप्थेल्मोस्कोप, सिल्ट लैंप, विजन
टेस्टिंग ड्रम, ट्राई सेट विद ट्राई फ्रेम, नियर विजन चार्ट व टार्च खरीदी
गईं। एक सेंटर के उपकरणों की कीमत एक लाख रुपये के करीब है। इनमें से
प्राथमिक स्वास्थ्य
केंद्र बरौन के उपकरण पांच साल से सिविल अस्पताल
लिंजीगंज में कैद हैं। लापरवाहियों की हद देखिएगा। इस सेंटर पर नेत्र
परीक्षण अधिकारी मनीष दीक्षित की तैनाती है। हाजिरी रजिस्टर के वह मुताबिक
वह इलाज भी करने जाते हैं। हकीकत में वह ड्यूटी लोहिया अस्पताल में कर रहे
हैं। सीएमओ बताते हैं कि उन्हें (मनीष दीक्षित को)लोहिया अस्पताल से संबद्ध
किया
गया है। इससे यह साफ है कि विजन सेंटर बिना उपकरणों व परीक्षण
अधिकारी के चल रहा है। महकमे के अंदरखाने के लोगों पर भरोसा करें तो
संबद्धीकरण के आदेश होते रहे और इनका निरस्तीकरण भी। इन्हीं की मानी जाए तो
वास्तविक आदेश लोहिया से ऑन काल ड्यूटी का था। इस सबके चलते परीक्षण
अधिकारी को तनख्वाह सेंटर से मिल रही है, उपकरण कहीं डंप हैं और जिनके
लिए सेंटर खुला, वह मरीज आंखों में दर्द लिए इलाज की खातिर इधर उधर भटक रहे
हैं।
उपकरण उपयोग
टोनोमीटर सबलवाई की जांच ।
आप्थेल्मोस्कोप आंख के परदे की जांच।
विजन टेस्टिंग ड्रम नजर की जांच ।
ट्राई सेट विद ट्राई फ्रेम नजर व चश्मे के लिए जांच।
सिल्ट लैंप आंख की कार्निया की जांच।
नियर विजन चार्ट नजर की जांच।
टार्च आंख के भीतरी हिस्साें को देखने के लिए।
वर्जन
अस्पताल
निर्माण के दौरान विजन सेंटर के उपकरण सिविल अस्पताल लिंजीगंज में रखवा
दिए गए थे। यह तब से वहीं हैं। -डा. अनुज त्रिपाठी, प्रभारी चिकित्साधिकारी
मनीष दीक्षित की मूल तैनाती विजन सेंटर पर है। इन्हें
लोहिया अस्पताल से संबद्ध किया गया था। मार्च में यह संबद्धीकरण का आदेश
निरस्त कर दिया गया। उनकी ड्यूटी वहीं है। उपकरणों के बारे में जानकारी
नहीं है।-डा. राकेश कुमार, सीएमओ