लोहिया अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस। अमर उजाला
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सरकार भले ही अस्पतालों में अच्छे इलाज का दावा करती हो, लेकिन सच इससे उलट है। स्टाफ की मनमानी और लापरवाही से दिक्कतें मरीज भुगत रहे हैं। आयुष्मान वार्ड में भर्ती सामान्य मरीजों को 24 घंटे में मात्र एक बार ही डाक्टर देखने पहुंचते हैं। एक मरीज के हाथ में लगी विगो ऐसे निकाली, की तमाम ब्लड बह गया। इस पर मरीज के दामाद ने नाराजगी जताई।
शहर के पक्कापुल निवासी सुशीला (80) पत्नी स्व. नंदकिशोर को रविवार को ब्लड कम होने की वजह से आयुष्मान वार्ड के 82 नंबर बेड पर भर्ती कराया गया था। उनके पुत्र नहीं है।
पुत्रियां और दामाद ही हैं, जो उनकी सेवा कर रहे हैं। बुधवार को वृद्धा के हाथ में लगी विगो को स्टाफ ने निकाला। लापरवाही इतनी कि निकालते वक्त हाथ से खून बहने लगा। मौजूद दामाद अनिल कुमार ने बताया कि उन्होंने इसका विरोध किया, तो स्टाफ अभद्रता पर उतर आया। कहा कि अभी भी मरीज बेहद कमजोर हैं, बावजूद इसके जबरन छुट्टी की जा रही है।
इसी वार्ड में मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव रंपुरा निवासी रामौतार (70) पुत्र शिवदयाल को तीन दिन पहले भर्ती कराया गया था। वह बुखार से पीड़ित हैं। उनके पुत्र दिलीप कुमार ने बताया कि 24 घंटे में हम मरीजों को देखने सुबह करीब नौ या साढ़े नौ बजे के बीच एक बार डाक्टर देखने आते हैं। कोई सुनने वाला नहीं है।
आयुष्मान वार्ड में भर्ती तीमारदारों ने बताया कि नाम का आयुष्मान वार्ड है। यहां शौचालय में पानी की व्यवस्था तक नहीं है। यदि शौच जाना हो, तो मरीज, तीमारदार दूर गली में लगे वाटर कूलर से पानी लेकर आता है।
सीएमएस डा. अशोक कुमार ने बताया कि कोई शिकायत नहीं आई। ज्यादा बुजुर्गों की नशें पतली और कमजोर हो जाती हैं। विगो निकालते वक्त फटने का अंदेशा रहता है। इसीलिए दिक्कत आई होगी। वैसे वह दिखवाएंगे।