मिनिस्ट्री आफ डिफेंस द्वारा छावनी परिषद के उपाध्यक्ष शशिमोहन की सदस्यता होने की खूब चर्चा हुई। शशिमोहन को सीबीआई की एंटी करप्शन टीम ने दो लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
छावनी परिषद में 11 जनवरी 2015 को हुए चुनाव में वार्ड संख्या दो में शशिमोहन निर्वाचित हुए थे। शशिमोहन को छावनी बोर्ड में उपाध्यक्ष के तौर पर सदस्यों ने चुना था। छावनी परषिद के तहत निर्माण आदि का काम करने वाले ठेकेदार दिलीप सिंह के पेटी ठेकेदार हैदर अली खां उर्फ मंटू से शशिमोहन ने कार्य की गुणवत्ता पास करने क े लिए दो लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। पेटी ठेकेदार की शिकायत पर सीबीआई की एंटी करप्शन टीम ने 10 मई 2015 को शशिमोहन को रिश्वत लेत रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था। सीबीआई की टीम ने मामले में लिखा पढ़ी कर शशिमो
हन को सीबीआई की अदालत में पेश किया था। जहां से इन्हें जेल भेज दिया गया था। करीब साढ़े पांच माह जेल में रहने के बाद शशिमोहन को जमानत मिली थी। इस दौरान बोर्ड की बैठकों से गैर हाजिर रहने के कारण परिषद के अध्यक्ष व अधिशाषी अधिकारी ने सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव बनाकर प्रधान निदेशालय रक्षा संपदा को भेजा था। इसी क्रम में रक्षा संपदा की ओर से आदेश जारी कर उपाध्यक्ष शशिमोहन की सदस्यता समाप्त कर दी गई, ऐसी चर्चा दिन भर होती रही।
हालांकि आदेश आने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस चर्चा से छावनी परिषद के अधिशाषी अधिकारी हेमंत यादव से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल नहीं उठा। सूत्रों की माने तो उपाध्यक्ष की सदस्यता रद्द करने के आदेश को बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा।
पेटी ठेकेदार हैदर अली खां उर्फ मंटू ने बताया कि सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। अभी इस मामले में लिप्त अन्य लोगों पर भी कार्यवाही होगी। खबर लिखे जाने तक अधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो सकी थी। उपाध्यक्ष शशि मोहन से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मोबाइल आउट आफ कवरेज एरिया बोलता रहा।