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पहले दिन शैलपुत्री की पूजा अर्चना, उमड़ी आस्था

Sat, 21 Mar 2015 11:45 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ा। घरों में भी लोगों ने विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का पूजन अर्चन किया। मंदिरों में प्रसाद चढ़ाकर भक्तों ने मनौती मांगी। नवरात्र पर भोर में ही मंदिरों में पूजा अर्चन का सिलसिला शुरू हो गया था जो देर रात तक चलता रहा। घराें में घट की स्थापना की गई। इसके लिए पूजन स्थल के पास मिट्टी आदि से वेदी बनाई। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा और
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फोटो को गंगाजल से स्नान कराया। बालू और मिट्टी में जौं मिलाकर कलश की स्थापना कर आटा से नवग्रह और चौक बनाया। मां की मूर्ति को चौकी पर विराजमान कर उनका भव्य शृंगार किया। विधिविधान से पूजन कर मां की अखंड ज्योति भी  जलाई गई। भक्तों ने प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री से सुख, शांति और समृद्धि की मनौती मांगी। नवरात्र के चलते

गुरुगांव देवी मंदिर, शीतला देवी मंदिर बढ़पुर, वैष्णों देवी मंदिर भोलेपुर, मठिया देवी मंदिर और गमा देवी मंदिर फतेहगढ़ के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। सैकड़ों लोगों ने भोर की आरती में भाग लिया।  
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मोहम्मदाबाद प्रतिनिधि के अनुसार कसबे के महामाई मंदिर, मौधा स्थित गमा देवी मंदिर, खिसमेपुर स्थित गमा देवी मंदिर

और नीबकरोरी मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी। कायमगंज प्रतिनिधि के अनुसार नगर के फूलमती मंदिर, गमा देवी मंदिर, लंगड़े बाबा मंदिर, शिवाला मंदिर, लालता देवी मंदिर आदि में सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। घंटे घड़ियाल और माता के जयकारों से नगर गुंजायमान हो गया।  

मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे
नवरात्र का प्रथम दिन होने के बावजूद शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में महिला पुलिसबल नहीं दिखाई दिया। इक्का-दुक्का पुलिसकर्मी मंदिर के बाहर ही मुस्तैद नजर आए। हर बार की भांति इस बार भी नवरात्र पर मंदिरों के पास सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी ही थे। रेलवे रोड स्थित मठिया देवी मंदिर में दोपहर करीब 1.30 बजे तीन पुलिसकर्मी बैठे थे। शीतला

देवी मंदिर में दोपहर करीब 2.45 बजे दो सिपाही कुर्सी पर रायफल लिए बैठे थे। मंदिर के अंदर कोई भी पुलिसकर्मी नहीं था। गुरुगांव देवी मंदिर में सुबह 11 बजे मंदिर के बाहर पुलिसबल तैनात था। दो महिला सिपाही भी मौजूद थीं। लेकिन यहां भी मंदिर के अंदर सिपाही घूम नहीं थे।

नवरात्र पर बेटियों की सुरक्षा का लें संकल्प
बजरिया की रहने वाली बीए की छात्रा प्रज्ञा सक्सेना कहती हैं कि नवरात्र पर व्रत रखकर ही मां की पूजा पूरी नहीं होती। इस दिन लोग यह संकल्प भी लें कि बेटियों को बोझ नहीं समझेंगे। बागकूंचा की रहने वाली श्वेता सक्सेना कहती हैं कि नवरात्र पर लोग मां का पूजन करते हैं । अगर घर में बेटी का जन्म हो तो खुशी नहीं मनाते हैं। इस सोच को बदलना होगा। पूनम यादव कहती हैं कि बेटियां भी बेटों के समान ही होती हैं।
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