फर्रुखाबाद। नैमिषारण्य धाम से आए कथाव्यास पंकज महारथी ने कहा कि भाई की संपत्ति हड़पने से विनाश होना तय है। दुर्योधन यदि पांडवों को उनका हिस्सा तो दूर पांच गांव तक दे देता, तो पूरे कुटुंब का विनाश नहीं होता।
राजेपुर क्षेत्र के गांव खरगपुर में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को कथाव्यास पंकज महारथी ने दुर्योधन के वध की कथा का विस्तार से वर्णन किया। कहा कि दुर्योधन ने अपने पांडव भाइयों की संपत्ति हड़पने का पूरा प्रयास किया। उसने इसके लिए पांडवों पर घोर अन्याय किए। इसके बाद दुर्योधन के इस कृत्य से महाभारत हुआ। पूरे खानदान का विनाश हुआ। उन्होंने कहा कि महाभारत की यह घटना सिखाती है कि भाई की संपत्ति को ईमानदारी से उसे दे देना चाहिए। अन्यथा बेईमानी करने वाले का विनाश होना तय है। देर रात आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया। कथा के परीक्षित रूपलाल मिश्रा, पत्नी सुमन मिश्रा रहीं। आयोजन में ज्ञानेंद्र शुक्ला प्रधान, नरेंद्र शुक्ला, भुवनेश्वर अग्निहोत्री, अरविंद मिश्रा कोटेदार, प्रशांत दीक्षित समेत पूरे गांव के लोग मौजूद रहे।