मोहल्ला ग्राटगंज की दरगाह में हजरत महमूद शाह वारसी का उर्स अकीदत के
माहौल में शुरू हुआ। इस दौरान आयोजित जलसा ए सीरत में पैगंबर ए इस्लाम की
जिंदगी को नमूना बताकर जिंदगी गुजारने का लोगों को सबक दिया गया। कव्वालों
ने नातिया कलाम पेश किए। लोगों ने मजार पर फूलमालाएं चढ़ाईं।
शहर की
प्रसिदअध दरगाह हजरत कली शाह के प्रांगण में हजरत महमूद शाह वारसी के उर्स
का आगाज जलसा ए सीरत से हुआ। इसमें मौलाना अशरफ रजा ने कहा कि अल्लाह ने
पैगंबरे इस्लाम को दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा है। इसलिए लोग उनकी
जिंदगी को अपने लिए नमूना बनाएं और उनके दिए गए इंसानियत के पैगाम पर अमल
करें। उन्होंने कहा कि
सद्भावना, भाईचारा कायम रखना मुसलमानों की
जिम्मेदारी है। कहा कि इल्म हासिल करना मुसलमानों को फर्ज करार दिया गया
है। जब इल्म होगा तो इंसानियत का जज्बा पैदा होगा और बुराइयां दूर रहेंगी।
मौलाना ने कहा कि सूफियों ने पैगंबरे इस्लाम की तालीम पर अमल किया और सबको
गले लगाया। यही वजह है कि उनके मजारों पर बिना भेदभाव के लोग हाजिरी देने
को आते हैं।
मोहल्ला जफर वारसी के संयोजन में आयोजित उर्स में हाफिज
मुम्मताज वारसी, हाफिज दिलशाद रहमानी, सरताज मुजीबी आदि ने नातिया कलाम पेश
किए। अकीदतमंदों ने मजार पर फूलमालाएं चढ़ाकर दुआ मांगी। संयोजक ने बताया
कि गुरुवार को दोपहर 12.30 बजे कुल व फातिहा के बाद उर्स का समापन होगा।
कहा कि हजरत महमदू शाह का सूफी सिलसिला देवा
शरीफ के महान सूफी संत हजरत
वारिस अली शाह से मिलता है। उन्होंने अपनी जिंदगी सादगी से बिताई और बिना
भेदभाव के इंसानियत की सेवा करना अपना धर्म व कर्म समझा। यही वजह है कि
उनके चाहने वाले दूर-दूर तक फैले हुए हैं। इस अवसर पर महबूब खां, अच्छे
खां, गुलाम दस्तगीर खां, मतलूब, सरताज मीर खां, अब्दुल हमीद, पिंटू, लाडले
खां, वसीम खां, वीरन भाई और महमूद अंसारी आदि मौजूद रहे।