फर्रुखाबाद। कभी पाला तो कभी गलन से आलू की फसल में परपरा रोग लग रहा है। यह रोग झुलसा का प्रारंभिक चरण होता है। परेशान किसानों ने हालात को देखते हुए फसल में दवा का छिड़काव शुरू कर दिया है।
जिले में इस बार 43000 हेक्टेयर में आलू की फसल की बुआई की गई है। जो गत वर्ष की अपेक्षा 500 हेक्टेयर कम है। पिछले वर्ष 43500 हेक्टेयर में आलू की बुआई हुई थी। किसानों ने आलू की फसल के लिए एक बार फिर पुखराज के साथ ख्याति प्रजाति पर दांव लगाया है।
ये दोनों किस्में गुणवत्ता में भले ही टिकाऊ न हों लेकिन पैदावार में अन्य किस्मों के अपेक्षा सबसे अधिक लाभ देती हैं। हालांकि किसानों ने पक्की फसल के लिए 3797, चिप्सोना के साथ न्यू हालैंड, फ्राईसोना, कुफरी सिंदूरी की बुआई की है। नवंबर में बरसात होने के कारण आलू की फसल को अधिक नुकसान हुआ था।
खेतों में बरसात का पानी भरने से आलू का अधिकांश बीज सड़ गया था। किसानों को दोबारा से खेत में आलू बोना पड़ा था। इसके लिए खाद और बीज की खरीद करनी पड़ी थी। आलू की अगैती फसल होने से किसानों को दो बार फसल बोने का लाभ मिलता था।
कच्ची फसल ऊंचे दामों पर बिकने से घाटे की भरपाई होती थी, लेकिन इस बार बरसात के कारण अधिकतर किसानों की अगैती फसल बर्बाद हो गई। दिसंबर के अंतिम सप्ताह से जनवरी माह के शुरुआती दिनों में मौसम निरंतर करवटें बदल रहा हैं। कभी घना कोहरा तो कभी गलन से फसल प्रभावित हो रही है। इससे जिले के कई क्षेत्रों में आलू की फसल में परपरा रोग लगना शुरू हो गया है। कई किसानों का मानना है कि यदि बरसात हो गई तो फसल पर झुलसा रोग लग जाएगा।
राजेपुर क्षेत्र के गांव महेशपुर के किसान महावीर सिंह ने बताया कि उन्होंने चार बीघा भूमि पर आलू की फसल बोई है। मौसम खराब होने के कारण फसल में रोग लगना शुरू हो गया है। वह रोग से बचाने के लिए पहली बार दवा का छिड़काव कर रहे हैं।
इसी गांव के राजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने पांच बीघा जमीन में आलू बोया है। कोहरा और पाला के कारण परपरा रोग लगना शुरू हुआ है। वह दूसरी बार खेत में दवा का छिड़काव कर रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह ने बताया कि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण फसलों में रोग लग रहा है। किसानों को समय-समय पर खेतों में दवा का छिड़काव करना चाहिए। इस मौसम में खेत में नमी बनाए रखें। कीटनाशक और फफूंदीनाशक दवाओं का 15 दिनों के अंतराल में छिड़काव करें।
आलू शाक भाजी अधिकारी आरएन वर्मा का कहना है कि प्रत्येक वर्ष आलू की बुआई सीजन में गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को जानकारी दी जाती है। किसान अधिक उत्पादन के चक्कर में ध्यान नहीं देते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार 1336 क्विंटल उन्नत किस्म के बीज किसानों को उपलब्ध कराए गए थे। कहा कि यहां चिप्सोना, न्यू हालैंड, कुफरी सिंदूरी, फ्राईसोना सीड यहां की मिट्टी के लिए उपयुक्त हैं। जो किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम भी दिलाते हैं।