सहायक अध्यापक पदों पर समायोजन किए जाने की प्रक्रिया को उच्च न्यायालय से
रद्द किए जाने से हताश शिक्षामित्रों के संगठन एकजुट हो गए हैं। इन्होंने
रविवार को बैठक कर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इच्छा मुत्यु की मांग
करने का निर्णय लिया। इस दौरान सदमे में दो शिक्षामित्र बेहोश होकर गिर
पड़े। इनको पानी डाल कर होश में लाया गया। शिक्षामित्रों ने सोमवार को
शिक्षण कार्य का बहिष्कार कर विद्यालयों में तालाबंदी करने का निर्णय लिया
है। उच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद
शिक्षामित्रों को सपने चकनाचूर
हो गए हैं। इसको लेकर शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय परिसर में बैठक की।
इसमें इन्होंने एक दूसरे को अपनी समस्याएं बताईं। शिक्षामित्र रामवीर और
वृजेश सदमे के कारण बैठक में गश खाकर गिर पड़े। इनको पानी डालकर होश में
लाया गया। झिझुकी के शिक्षामित्र बलराम सिंह ने बताया कि दो बेटियों की
शादी के लिए बैंक से लोन लिया
था। नौकरी जाने से अब बैंक का कर्जा चुकाना
मुश्किल होगा। शिक्षामित्र शिखा भदौरिया ने बताया कि पति ने छोड़ दिया था।
शिक्षक पद पर समायोजन से जीवनयापन की चिंता समाप्त हो गई थी। अब परिवार का
जीवन पालना मुश्किल होगा। शिक्षामित्र सीता ने बताया कि एक माह पूर्व पति
की मृत्यु हो गई थी। समायोजन रद्द होने से जीवन चलाना मुश्किल होगा। इस
संकट के
समय में शिक्षामित्रों के दोनों संगठन एकजुट हो गए हैं। यह हक पाने
के लिए अभी भी लड़ाई जारी रखने को तैयार हैं। संगठन के जिलाध्यक्ष अनुराग
पांडेय और ऋषीपाल सिंह यादव ने बताया कि समायोजन रद्द होने से
शिक्षामित्रों के सामने एक समस्या
उत्पन्न हो गई है। शिक्षामित्र सामूहिक
रूप से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इच्छा मृत्यु की मांग करेंगे। 14
सितंबर को शिक्षण का बहिष्कार कर विद्यालयों में तालाबंदी का निर्णय लिया
गया है। इन्होंने शिक्षक संगठनों से संकट के समय सहयोग करने की अपील की है।
इस दौरान उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह यादव ने कहा कि वह संगठन के सहयोग से
शिक्षामित्रों की लड़ाई लड़ते रहेंगे।