चालू वित्तीय सत्र का यह आखिरी महीना है। 31 मार्च तक पैसा पूरा खर्च न
होने पर वह शासन को वापस चला जाएगा। डीएम एनकेएस चौहान समय से काम पूरे
करने की हिदायतें दे चुके हैं। इसके बाद भी अधिकारियाें ने फुर्ती नहीं
दिखाई है। लोक निर्माण विभाग के कई काम अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। जिला
योजना में पहले तो बजट पूरा मिला नहीं।
जितना मिला भी है, वह भी नहीं लगता
कि खर्च किया जा सकेगा। ऐसा ही कुछ हाल अनुसूचित वित्त विकास निगम की
स्पेशल कंपोनेंट योजना का है। बैंकाें ने बड़ी संख्या में पत्रावलियां लटका
ली हैं। इसके बाद बिना वजह बताए भी पत्रावलियाें को वापस कर दिया गया।
इससे लाभार्थियाें को इस सत्र में लोन मिल पाना संभव नहीं लग रहा है।
जिला योजना का हाल
चालू
सत्र में 96 करोड़ 11 लाख रुपये की जिला योजना अनुमोदित हुई थी। इसमें
काटछांट के बाद 64 करोड़ 4 लाख रुपया प्रावधानित किया गया। इसमें से 33.54
करोड़ रुपया ही अवमुक्त किया गया। इस पैसे को संबंधित विभागाें को दे दिया
गया। इसमें से अभी तक 30.47 करोड़ रु पया खर्च होने की रिपोर्ट महकमों ने
दी है।
लोक निर्माण विभाग ने 1 करोड़ रुपया खर्च होने की सूचना दी है
लेकिन अर्थ एवं संख्या विभाग को रिपोर्ट ही नहीं दी है। इन हालाताें में
प्रावधानित बजट में से बाकी पैसा मिलने की अब उम्मीद ही नहीं लग रही है।
लोक निर्माण विभाग के काम अधूरे
लोक
निर्माण विभाग के कई काम अधूरे हैं। वित्तीय सत्र का आखिरी महीना होने के
बाद भी अधिकारी काम पूरा करवाने में तेजी नहीं दिखा रहे है। नसरुल्लापुर
संपर्क मार्ग 41 लाख रुपये से बनना है। यह काम फ रवरी में शुरू हुआ है।
मिल्किया संपर्क मार्ग की लागत 45 लाख रुपये है। इसका निर्माण भी फ रवरी
में चालू कराया गया। 29 लाख से नगला सिमरा मार्ग का निर्माण भी इसी माह
में शुरू हुआ।
कंपिल इकलहरा अटैना घाट पहुंच मार्ग 3 करोड़ 45 लाख रुपये से
वर्ष 2009 से बन रहा है। काम पूरा नहीं हुआ है। फर्रुखाबाद-छिबरामऊ फोरलेन
सड़क का काम भी इस वित्तीय सत्र में पूरा होता नहीं लग रहा है। जौरा
मार्ग व नगला देवी मार्ग के भी इस माह में निर्माण पूरा होने की उम्मीद
नहीं है।
स्वत: रोजगार योजना लटकी
स्पेशल कंपोनेंट प्लान की
स्वत: रोजगार योजना के सभी आवेदकों को भी इस सत्र में लाभ मिल पाना
मुश्किल लग रहा है। योजना के तहत अनुसूचित जाति के बेरोजगारों को
स्वरोजगार के लिए 50 हजार से 7 लाख रु पये तक का लोन दिया जाता है। इसमें
10 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। लोन के लिए 1100 ने आवेदन किया
था। इनमें से 886 क ी पत्रावलियां लोन स्वीकृत करने के लिए 18 बैंकों की
शाखाओं को भेजी थीं।
इनमें से 331 आवेदकों की पत्रावलियां स्वीकृत की
गईं। इनमें से 50 आवेदकों को ही बैंकों ने लोन दिया है। 269 की
पत्रावलियां वापस कर दी गईं। 286 आवेदकों की पत्रावलियां अभी भी लोन के
लिए लंबित हैं। इससे इस सत्र में 555 आवेदकों को लोन मिलना मुश्किल हो गया
है। अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के प्रबंधक दीनदयाल ने बताया कि बैंक
शाखाओं के प्रबंधकों को लोन स्वीकृति के लिए लिखा जा रहा है।