मालगोदाम प्लेटफार्म पर लोड हो रही रैक
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आलू किसानों की बाहरी प्रांतों में आलू भेजने की समस्या का लगभग समाधान हो गया है। रेलवे ने यहां खड़ी पहले से बुक व्यापारियों की दो रैकें निरस्त कर दी हैं। साथ ही रैक में किसानों के आलू की लोडिंग शुरू करा दी है। रेलवे के अधिकारियों ने यह फैसला अमर उजाला में छपी खबर का संज्ञान लेने के बाद किया। अब केवल सुशील कुमार गुप्ता की दो रैकें बुक रह गई हैं।
रेलवे और बड़े व्यापारियों की मिलीभगत से व्यापारियों ने नियम विरुद्घ पहले से ही पांच रैकें बुक करा रखी थीं। यहां पहुंची रैक को कई दिन रोककर व्यापारी किसानों का आलू औने-पौने दामों में खरीद रहे थे और किसानों को रैक उपलब्ध नहीं होने दे रहे थे। किसानोें की समस्या की खबर अमर उजाला ने 17 मार्च के अंक में प्रकाशित की थी।
खबर पर पहले से बुक बाबूराम जगदीशचंद्र और सुशील कुमार गुप्ता की दो रैकें निरस्त कर दी गईं, जबकि 14 मार्च को यहां गेहूं लेकर पहुंची रैक को तीन दिन रोका गया और 16 मार्च को उसे खाली वापस कर दिया गया। रेल विभाग 16 मार्च की रात को फिर यहां गेहूं लेकर आई रैक को वापस भेजता।
खबर छपने पर रेल विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन दो रैकों को यह कहकर निरस्त कर दिया कि इनका समय निकल गया है, जबकि अभी तक समय निकलने के बाद भी रैकें भेजी जाती रही हैं। यहां पहुंची गेहूं की रैक को कृष्ण कुमार गुप्ता के नाम लोड कराना शुरू कर दिया गया। 42 हजार पैकेट इस रैक से कल तक रवाना होंगे।
रेलवे विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब केवल दो रैक बुक रह गई हैं, जिन्हें दो-चार दिन के भीतर भेज दिया जाएगा। न्यामतपुर ठाकुरान के किसान मुन्नू सिंह और वृंदावन मिश्र ने बताया कि वह महीनों से चक्कर लगा रहे हैं। नियम विरुद्घ रैकें व्यापारियों की बुक कर ली जाती थीं। रेल मंत्रालय को वह शिकायत भेज चुके हैं। उनका कहना है कि अब किसानों को उम्मीद जगी है कि उन्हें अपना आलू बाहर ले जाने का अवसर प्राप्त हो जाएगा। वहीं दूसरी तरफ रेल विभाग के माल अधीक्षक शिवकुमार शर्मा ने बताया कि अब किसानों को रैक बुक कराने में दिक्कत नहीं होगी। वह जब चाहें, तब यहां आकर रैक बुक करा सकते हैं।