फर्रुखाबाद। शहर की सातनपुर मंडी में तैनात सचिव की 16 वर्ष की आयु में नियुक्ति के मामले में अपनों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। जांच में पुष्टि हाेने के बाद मामला पुराना बताकर दबाने की कोशिश शुरू हो गई है। वर्ष 2011 में हुई पदोन्नति का आदेश वायरल होने पर कम उम्र में नियुक्ति की पोल खुली थी।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद लखनऊ के मंडी निदेशक राजेश कुमार सिंह के 24 मार्च 2011 के आदेश में 48 मंडी सहायकों को अमीन/नीलामकर्ता(मंडी निरीक्षक) के पद पर पदोन्नत किया गया था। पदोन्नति आदेश व हाईस्कूल के अंकपत्र में सातनपुर मंडी के सचिव रामसेवक वर्मा की जन्म तिथि 15 जुलाई 1967 अंकित है।
वहीं, उनकी नियुक्ति तिथि एक जुलाई 1983 दर्शाई गई है। इस हिसाब से नियुक्ति के दौरान मंडी सचिव की आयु 15 वर्ष 11 माह 17 दिन हो रही है। सरकारी सेवा के लिए कम से कम 18 वर्ष की आयु निर्धारित है। 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से काम कराना बाल श्रम अधिनियम के अंतर्गत आता है।
अमर उजाला ने नौ जून के अंक में सचिव की पदोन्नति आदेश पर उम्र 16 वर्ष दर्ज, शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इससे अधिकारी हरकत में आ गए। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद लखनऊ के मंडी निदेशक ने मामले का संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए। उपनिदेशक कानपुर ने टीम के साथ 20 जून को मंडी पहुंचकर जांच की।
इसमें सचिव की नियुक्ति में कम उम्र होने की पुष्टि हुई। मंडी कर्मचारियों का कहना है कि उपनिदेशक कार्यालय से लगातार वेतनवृद्धि होती रही और पदोन्नति भी कर दी गई। कम उम्र में नियुक्ति को सभी ने नजरंदाज किया। सही से जांच हो तो कई जिम्मेदार फंसेंगे। इसीलिए मामला दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
मंडी निदेशक लखनऊ अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि मंडी सचिव की कम आयु में नियुक्ति का मामला सही है। तत्कालीन उपनिदेशक द्वारा 1983 में नियुक्ति के दौरान आयु में रिलेक्सेशन दिया गया था। वह आदेश भी उन्हें दिखाया गया। यह भी पता नहीं कि नियोक्ता जीवित भी है या नहीं। इतने वर्षों बाद नियुक्ति का मामला उठाना भी ठीक नहीं है।