मकर संक्रांति करीब आते ही भगीरथी के तट पर श्रद्धा की धारा बहने लगी है। संतों ने डेरा जमाना शुरू कर दिया। वहीं, व्यापारी भी दुकानों का आवंटन करा रहे हैं। मेले की व्यवस्था के लिए प्रशासनिक पंडाल भी बनने लगा। सांस्कृतिक पंडाल बनाने की भी तैयारियों जोरों पर हैं।
पांचालघाट स्थित गंगा तट पर माघ में कल्पवास को एक माह के लिए तंबू की नगरी बसती है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इसी को देखते हुए मेला रामनगरिया की तैयारियां तेज हो गई हैं। एक ओर दुकानों का आवंटन हो रहा है तो दूसरी ओर साधु-संत डेरा जमाने लगे। कोई संत अपनी राउटी लगा रहा तो कोई फूस की झोपड़ी बनाने में मशगूल है। कहीं संत धूनी रमाए बैठे तो कोई तालियां, चिमटा बजाकर भजन-कीर्तन कर रहे हैं। अपने क्षेत्र की पहचान को झंडे व अन्य निशान लगाए जा रहे।
जिला प्रशासन का पंडाल भी टिन शेड लगाकर तैयार कर दिया गया। सांस्कृतिक पंडाल के लिए बांस-बल्ली लगाई जा रही हैं। कल्पवासियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए चिकित्सालय के लिए टिन शेड लगा दिए गए। साथ ही रेत पर समतलीकरण भी किया जा रहा है। मेला प्रबंधक संदीप दीक्षित ने बताया कि उद्घाटन से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। मकर संक्रांति से कल्पवासियों की राउटी लगने लगेंगी।