फर्रुखाबाद। श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में 10 दिन चले दसलक्षण पर्व के समापन पर सोमवार को क्षमा मांगी गई। मुख्य वक्ता कन्हैया लाल जैन ने कहा कि क्षमा याचना मन से करनी चाहिए। जब तक मन की कटुता दूर नहीं होगी तब तक क्षमावाणी पर्व मनाने का कोई अर्थ नहीं है। क्षमा मांगने का यह विशेष अनुष्ठान है।
मोहल्ला जोगराज स्थित मंदिर में कन्हैयालाल जैन ने कहा कि जिनमत विश्व का धर्म है। इसका ही दूसरा नाम पर्यूषण पर्व है। यही पर्व पापों का नाश करता है। इसी से शाश्वत सुख की अनुभूति होती है। पर्यूषण पर्व के 10 धर्मों में उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, सशौच, संयम, तप, त्याग, अकिंचन और उत्तम ब्रह्मचर्य है। यह धर्म चारों गतियों के दुखों से निकालकर मोक्ष सुख को करने वाले हैं।
मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष वत्सला अग्रवाल ने कहा कि भगवान महावीर ने हमें आत्मकल्याण के लिए 10 धर्मों के 10 दीपक दिए हैं। प्रतिवर्ष पर्यूषण आकर हमारे अंत:करण में दया, क्षमा और मानवता जागने का कार्य करता है। बिंदिया भटनागर ने कहा कि जैसे हर दिवाली पर घर की साफ सफाई की जाती है, उसी तरह पर्यूषण मन की सफाई करने वाला पर्व है। कन्हैया लाल जैन, कमल कुमार जैन, रोमिल जैन, अभिषेक जैन, नीरज जैन, चिराग जैन, ग्रंथ जैन ने अभिषेक पूजन किया।
आयोजन में पवन कुमार जैन, मयंक जैन, राजीव जैन, सुरेन्द्र सफ्फड, एसबीआई के चीफ मैनेजर अवनीश कुमार गुप्ता, पूनम जैन, मणि जैन, विमला जैन, कल्पना जैन, चेतना जैन आदि थे।