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मिडडे मील खाने आते स्कूल

Tue, 16 Dec 2014 11:53 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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फर्रुखाबाद। सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन अनिवार्य है। यहां गरीब परिवार के बच्चेे पढ़ने आते हैं। इनको स्कूल में खाना मिलने का इंतजार रहता है। वे खाना खाने के बाद स्कूल से चले जाते हैं। अफसरों की निरीक्षण आख्याओं के आंकड़े बयान करते हैं कि सरकारी स्कूलों में बच्चे सिर्फ खाना खाने आते हैं।
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परिषदीय, सरकारी, अशासकीय, माध्यमिक शिक्षा विभाग के राजकीय, अशासकीय स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन दिया जाना अनिवार्य है। स्कूलों में खाना बटने के दौरान बच्चों की संख्या अधिक और इसके बाद घट जाती है। स्कूलों में एमडीएम रजिस्टर में अंकित बच्चों की संख्या, उपस्थित से खासी भिन्न होती है। यह हकीकत अफसरों को निरीक्षण के दौरान कई बार मिली है।
विभागीय आंकड़े बताते हैं कि एमडीएम वितरण के दौरान और इसके बाद स्कूलों में उपस्थित बच्चों की संख्या में भिन्नता होती है। पंजीकृत बच्चों में 70 से 80 फीसदी बच्चे एमडीएम से लाभान्वित  दिखाए जाते हैं। जबकि अफसरों को निरीक्षण के दौरान मौके पर 45 से 50 फीसदी बच्चे ही मिलते हैं। यह भिन्नता इस बात का खुलासा करती है कि बच्चे एमडीएम खाने ही स्कूल में आते हैं।
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इतने स्कूलों में बनता है एमडीएम
सरकारी प्राइमरी स्कूल        1290
सरकारी जूनियर स्कूल         565
अशासकीय विद्यालय        51
माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूल
राजकीय विद्यालय        5
अशासकीय विद्यालय    63
 
11 करोड़ कन्वर्जन कास्ट और 2500 मीट्रिक टन खाद्यान्न
योजना के तहत सरकारी स्कूलों में हर साल बच्चों को खाना खिलवाने में सरकार कन्वर्जन कास्ट में 10 से 11 करोड़ रुपये खर्च करती है। इसके साथ लगभग 2550 मीट्रिक टन खाद्यान्न खर्च होता है।
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