गंगा के सोता में छोड़ा तीन नालों का पानी
फर्रुखाबाद। शासन के फरमान के बाद आखिरकार एक मुख्य स्नान निकलने के बाद पालिका ने शहर के एक नाले के पानी को गंगा में जाने से रोक दिया। अब इस पानी का बहाव गंगा के सोता नाले की ओर कर दिया गया। हालांकि यहां बायो रेमेडिएएशन (जैविक उपचार) की कोई व्यवस्था नहीं दिखाई दी।
नगर पालिका परिषद के अधिकारी नालों के पानी का जैविक उपचार करने के लिए 36 लाख रुपये खर्च करने की बात कह रहे हैं। शहर के भीकमपुरा, टाउनहाल और नाला मछरट्टा नालों का पानी एक साथ भैरों घाट के पास गंगा में गिरता है। सोता बहादुरपुर में दो, धिमरपुरा में एक नाला भी गंगा में प्रदूषण फैला रहा है। माघ मेला और रामनगरिया को देखते हुए शासन ने सभी नालों को बंद करने के निर्देश पालिका और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिए थे।
मकर संक्रांति का पर्व निकलने के बाद शनिवार को अधिशासी अधिकारी रविंद्र कुमार, जेई गौरव मिश्रा ने टीम के साथ पहुंचकर माधवपुर की पुलिया के पास से नाले को बंद कर दिया। अब इस नाले का बहाव गंगा के सोता नाले की तरफ मोड़ा गया है। यह पानी उसी सोता में भरता रहेगा।
पालिका भले ही पानी का जैविक उपचार करने की बात कह रही हो, मगर यहां कोई भी ऐसी मशीन अथवा टैंकर नहीं पहुंचे, जिससे पानी का शुद्धीकरण किया जा सके। ईओ ने बताया कि तीन नालों का पानी रोक दिया है। अब अन्य नाले भी रोके जाएंगे। उसके बाद उपचार की व्यवस्था होगी।
पांचाल घाट के पास गिर रहे तीन नाले
पांचाल घाट पर जहां स्नान होता है, वहीं धिमरपुरा में एक बड़ा नाला गिरता है। इसमें शहर के बड़े हिस्से का पानी जाता है। इसके अलावा सोता बहादुरपुर के भी दो नालों का पानी गंगा में बहाया जा रहा है।