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लोहिया को छोड़ किसी अस्पताल में नहीं होता अल्ट्रासाउंड

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फर्रुखाबाद। सरकार का दावा है कि हर जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है, लेकिन हकीकत एकदम अलग है। लोहिया पुरुष अस्पताल को छोड़ आठ सीएचसी, सिविल अस्पताल लिंजीगंज के मरीज निजी जांच केंद्रों पर जाने को मजबूर हैं।
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जिले के डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल और कायमगंज सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की मशीनें लगी हैं। लोहिया अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के दो पद सृजित हैं, मगर एक की तैनात है। यहां रोजाना 25-30 मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। दोपहर डेढ़ बजे तक जो मरीज पहुंचता है, उसका अल्ट्रासाउंड हो जाता है।
कायमगंज सीएचसी पर रेडियोलॉजिस्ट न होने से मशीन धूल फांक रही है। इसके अलावा सिविल अस्पताल लिंजीगंज, सीएचसी बरौन, कमालगंज, मोहम्मदाबाद, नवाबगंज, शमसाबाद, राजेपुर, कंपिल सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं, पेट से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को निजी जांच केंद्र जाना पड़ रहा है।
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महीने में 10 दिन कोर्ट में रहते हैं रेडियोलॉजिस्ट
लोहिया अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. योगेंद्र सिंह सुबह आठ से 11 बजे तक मेडिकोलीगल रिपोर्ट बनाते हैं। इसके बाद दो बजे तक अल्ट्रासाउंड करते हैं। महीने में 10 दिन कोर्ट में जाना होता है। इससे अगले दिन मरीजों की संख्या 40 तक पहुंच जाती है।
महिला अस्पताल में दो साल से अल्ट्रासाउंड बंद
लोहिया महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन लगी है। मगर दो साल पहले तैनात डॉक्टर की संविदा समाप्त होने के बाद किसी और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं की गई। तभी से मशीन रखी है। रोजाना आने वाली 50 से अधिक गर्भवती महिलाओं को निजी सेंटरों पर जाना पड़ता है।
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‘रेडियोलॉजिस्ट के दो पद हैं, मगर शासन से एक ही तैनाती है। काम की अधिकता के चलते मरीजों को दिक्कत है। फिर भी अल्ट्रासाउंड के लिए कोई भी वेटिंग नहीं है। जो मरीज समय से पहुंचता है, उसका अल्ट्रासाउंड हो जाता है।’
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-डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल
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