फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Farrukhabad News: घर में राशन न ईंधन, बाढ़ पीड़ितों को रोटी के भी लाले

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

अमृतपुर। करीब एक माह से बाढ़ के पानी में फंसे ग्रामीणों के घरों में राशन व ईंधन खत्म हो जाने से रोटी के लाले हैं। राहत सामग्री खत्म हो चुकी है। इससे गेहूं पिसवाने के लिए बाढ़ के पानी में घुसकर या नाव से कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर (सेमी.) ऊपर स्थिर है।

गंगा में आई बाढ़ से क्षेत्र के करीब 100 गांव से ज्यादा प्रभावित हैं। इन गांवों व रास्तों पर एक माह से बाढ़ का पानी भरा है। गंगा का जलस्तर शनिवार को स्थिर रहने के बावजूद खतरे के निशान से 10 सेमी ऊपर 137.20 मीटर पर है। नरौरा बांध से गंगा में एक लाख 7213 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। क्षेत्र में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन ग्रामीणों की दुश्वारियां बरकरार हैं।
विज्ञापन

रामगंगा का जलस्तर 134.80 मीटर से पांच सेमी घटकर 134.75 मीटर पर पहुंच गया है। रामनगर बैराज से 3145 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बाढ़ से घिरे लगभग 150 गांवो में से 30 गांव में प्रशासन ने 4833 बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरण की थी। कई दिन बीत जाने से राहत सामग्री भी खत्म हो चुकी है। घरों में व रास्तों में बाढ़ का पानी भरा होने से आवागमन बाधित है।
घरों में राशन न होने खाने-पीने की भी दिक्कत है। गेंहू पिसवाने के लिए ग्रामीणों को सिर पर बोरी रखकर या नाव से बाढ़ का पानी पार कई किमी दूर जाना मजबूरी है।
बाढ़ पीड़ितों ने बयां किया दर्द
फोटो - 28,

गांव हरसिंहपुर कायस्थ निवासी रामसरन का कहना है कि बाढ़ का पानी घरों में कई दिन से भरा है। छत, ट्रैक्टर-ट्राली, तख्त या खुले में सड़क के किनारे रह रहे हैं। आवागमन नाव से ही हो पा रहा है। गांव से करीब पांच किलो मीटर दूर गेहूं पिसवाने जाना पड़ता है।



गांव हरसिंहपुर कायस्थ निवासी मातादीन का कहना है कि बाढ़ के पानी से गांव घिरा होने से अब खाने-पीने के लाले पड़ने लगे हैं। तहसील प्रशासन से मिली राहत सामग्री खत्म हो चुकी है।



गांव मंझा निवासी अनार सिंह कहना है कि उनका गांव तहसील मुख्यालय से करीब तीन किमी दूर गंगा किनारे बसा है। बाढ़ के पानी से रास्ता बंद है। खाद्य सामग्री लेने के किए बलीपट्टी तक जाने में कई घंटे लग जाते हैं।
विज्ञापन




गांव मंझा निवासी मुकेश कहते हैं कि बाढ़ का पानी घरों में भरा है। घर में राशन समाप्त हो गया है। नाव में गेंहू लाद कर अमृतपुर पिसाने के लिए आते हैं। तहसील प्रशासन से मिला राशन भी खत्म हो गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें