फर्रुखाबाद। शहर में एक साथ घुसने वाले स्कूली वाहन, ई-रिक्शा पर जिम्मेदार नियंत्रण खो बैठे हैं। लालगेट, चौक, पक्कापुल पर चालक का चेहरा देख चौपहिया वाहनों को नो-एंट्री में भी एंट्री मिलती है। दुकानों के बाहर सड़क तक ग्राहकों के वाहन खड़े होना आम हो गया। यातायात विभाग नियम का पालन कराने में पूरी तरह नाकाम है। जाम में फंसने से मुक्ति के लिए ग्राहक शहर में घुसना नहीं चाहता। लिहाजा व्यापारियों को भी घाटा हो रहा है।
शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। बढ़पुर, रोजवेज बस अड्डा, घुमना, चौक, पक्कापुल, तिकोना, कादरीगेट आदि पर दिन भर जाम लगा रहा। इसके पीछे मुख्य कारण संबंधित विभाग यातायात नियमों का पालन नहीं करवा पाती। रोडवेज पर भारी भरकम सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं, मगर डग्गामार टेंपो, मैजिक, ई-रिक्शा आदि सड़क पर खड़े होकर दिन भर सवारियां भरते हैं। यही नहीं फुटपाथ ठेली खोमचे वालों से भरे हैं।
लालगेट से पक्कापुल तक कागजों में भले ही सुबह आठ से रात आठ बजे तक नो-एंट्री जोन हो, मगर हर वक्त चौपहिया वाहन, ई-रिक्शा, टेंपो, हथठेली की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। लालगेट, चौक, पक्कापुल से यातायात कर्मी बिना विरोध के ही कारों को जाने की अनुमति देते हैं।
नेहरू रोड और रेलवे रोड का आलम यह है कि दुकानों के आगे मालिक अपने वाहन खड़े करते हैं। इसके बाद ग्राहकों के वाहन सड़क पर खड़े होते हैं। इसका परिणाम जाम में तब्दील हो जाता। स्कूलों की छुट्टी होने पर दोपहर ढाई से साढ़े तीन बजे एक साथ स्कूल की बड़ी बसें, टेंपो, ई-रिक्शा और छात्र-छात्राओं की साइकिलों की अधिकता होने से लाल सराय से तिकोना तक जाम लगना आम बात हो गई है। ऐसा नहीं कि जाम से आमजन को ही दिक्कत हो। इसका व्यापारी भी खामियाजा भुगत रहे हैं।
शॉपिंग स्टोरों से खरीदारी आसान
तमाम परिवार अपने बच्चों के साथ खरीदारी करने आते हैं। शहर में जाम फंसने से मुक्ति के लिए वह शॉपिंग स्टोर से बड़ी खरीदारी करके कारों, बाइकों से घर चले जाते। जबकि यदि जाम में फंसने का डर न हो, तो पास में ही दुकानों से भी खरीदारी कर सकते हैं। इसका खामियाजा दुकानदारों को उठाना पड़ रहा है।
ई-रिक्शा का हो रूट निर्धारण, स्कूलों में लगे छोटे वाहन
फोटो-12, राजू बाथम
शहर के जरनल स्टोर स्वामी राजू बाथम कहते हैं कि समस्या समाधान को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है। हालात ऐसे हैं कि 50-50 ई-रिक्शों की लंबी लाइनें बाजार में घुसती हैं। इसी दौरान गली से कार आ जाए तो जाम लग जाता। इनका रूट निर्धारण हो जाए, तो समस्या का समाधान हो सकता है। इसका हम व्यापारियों को भी फायदा होगा।
फोटो- 11, कुलदीप शर्मा
कुलदीप शर्मा कहते हैं कि स्कूलों में बड़ी बसें लगी हैं। यह एक साथ शहर के मुख्यमार्ग पर घुसतीं, तो जाम लगता चला जाता। छोटे वाहन लगने चाहिए, ताकि कम जगह में निकल जाएं। कारों को भी सख्ती के साथ रोक दिया जाए, तभी समस्या का समाधान हो जाता है।
-आपातकालीन सेवा वाले वाहन ही लालगेट से घुसते हैं। अन्य किसी वाहन को नहीं घुसने देते। स्टाफ की कमी के चलते गलियों और छोटे मार्गों से वाहन घुस जाते हैं। वह बाजार में घूमकर चालान भी करते रहते हैं। शीघ्र ही बैठक करके स्थायी समाधान कराएंगे।
-रजनेश कुमार, यातायात उपनिरीक्षक, फर्रुखाबाद