गोशालाओं में व्यवस्था की कमी कहें या चिकित्सा सुविधा की, फिलहाल गोवंश के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। शनिवार को नगरपालिका की गोशाला में फिर दो गायों ने दम तोड़ दिया जबकि पांच गायों की हालत गंभीर है। अपनी कमी छिपाने के लिए गंभीर हालत में गायों को कटरी धर्मपुर स्थित गोशाला में शिफ्ट कर दिया जाता है। इससे उनके मरने पर उन्हें आसानी से जंगल में दफनाया जा सके।
शहर में नगरपालिका की तीन गोशालाएं हैं। फतेहगढ़ में ट्रांजिट हास्टल की गोशाला में तीन दिन से डाक्टर के न पहुंचने से इलाज के अभाव में दो गायों ने दम तोड़ दिया जबकि सांड़ के पटकने से घायल सहित पांच गायों की हालत गंभीर है। पालिका से डीसीएम भेजी गईं और मरी व बीमार गायों को कटरी धर्मपुर स्थित गोशाला भेज दिया गया।
हालत ये है कि गोशाला में सांड़, गायें व बच्चे एक साथ रखे जा रहे हैं। इनके लिए न तो पर्याप्त टिन शेड है और न ही चरही। इससे सांड़ों के भय से कमजोर गोवंश भूखों मर रहे हैं। कई तो सांड़ों के हमले से घायल हैं। हरा चारा तो उन्हें देखने तक को नसीब नहीं होता।
लापरवाही व लचर व्यवस्था को लेकर कोई भी जिम्मेदार गंभीरता नहीं दिखा रहा है। हालांकि गोशाला में खानपान की व्यवस्था और चिकित्सा सुविधा को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। गोशाला में तैनात डाक्टर रोज जाते ही नहीं। इससे इलाज के अभाव में गोवंश दम तोड़ देते हैं।
बीमार गोवंश का सही से नहीं होता इलाज
गोशाला की देखरेख कर रहे नगरपालिका के लिपिक विजय शुक्ला ने बताया कि गाय मरने की जानकारी हुई है। फतेहगढ़ की गोशाला में तैनात पशु चिकित्सक सही तरीके से इलाज नहीं कर रहे हैं। रोज वे गोशाला जाते भी नहीं, तो इलाज क्या करेंगे।
इसी से बीमार गायों को कटरी धर्मपुर गोशाला में शिफ्ट करा दिया जाता है। वहां डा.पीके शर्मा पशुओं का सही इलाज करते हैं। कई बार बीमार गायों को बचाया भी जा चुका है। ट्रांजिट हास्टल गोशाला में 210 गोवंश बंद हैं। कुत्ते न पहुंचें, इसके लिए बाउंड्रीवाल पर तार लगाए जा चुके हैं। चरही, टिनशेड व अन्य व्यवस्थाएं भी दुरुस्त करने का प्रयास चल रहा है।
पार्टीशन न होने से आ रही दिक्कत
पशु चिकित्सक देवेंद्र कुमार ने बताया कि वह टीकाकरण में व्यस्त हैं। इससे दो दिन से ट्रांजिट हास्टल स्थित गोशाला नहीं पहुंच सके। गोशाला में पार्टीशन न होने से सांड़ कमजोर गायों व बछड़ों को भूसा खाने ही नहीं देते। सांड़ों के पटकने से चार गाय चुटहिल हैं।
उनका इलाज किया जा रहा है। टिन शेड भी पर्याप्त नहीं है। गोवंश की संख्या के सापेक्ष चरही काफी कम हैं। इससे सभी को पर्याप्त चारा भी नहीं मिल पाता। इस संबंध में वह नगरपालिका ईओ को लिखकर भी दे चुके हैं। सही इलाज न देने का आरोप गलत है। पार्टीशन व अन्य व्यवस्थाएं ठीक होने पर गायों को बचाना आसान होगा।