रविवार को सुबह करीब 11.40 बजे फि र भूकंप के झटके
महसूस किए गए। टीवी पर दिखे नेपाल में तबाही का मंजर आंखाें के सामने आते
ही लोगों चेहरे दहशत से जर्द हो गए। लोग गली और खुले मैदानाें की ओर भागने
लगे।
इससे अफ रा तफरी का माहौल बन गया। शनिवार क ी दोपहर को भी
भूकंप के झटके लगे थे। रात में फिर भूकंप आने की अफ वाहाें ने लोगाें को
सोने नहीं दिया। मोहल्लों में जगराता होता रहा।
शनिवार को भूकंप के
झटकाें का खौफ खत्म भी नहीं हुआ था कि रविवार को करीब 12.40 बजे लोग फिर
कांप गए। धरती हिलने से इनके दिमाग में नेपाल की तबाही का मंजर कौंध गया।
मुंह से निकला, भागो, फिर भूकंप आया। यह सुनते ही शहर के मोहल्ला मनिहारी
में जरदोजी कारखानाें के कारीगर भाग निकले।
गली में आकर सांस ली।
घराें से भी लोग निकलकर बाहर आ गए। काफ ी देर बाद ये सामान्य हो पाए। खतरे
का कोई अंदेशा न देखकर लोग वापस अपने ठिकानाें में पहुंचे। इसके बाद भी लोग
चौकन्ने बने रहे। जरदोजी कारीगर मोईनुद्दीन ने बताया कि कपड़े पर टांकने
के लिए रखे सितारे हिलने लगे थे।
चौकन्ने हुए तो लगा कि धरती हिल
रही है। नफीसुल ने बताया कि पास में रखा पानी का जग हिलने लगा था। अजीज और
आसिफ का कहना था कि ऐसा लगा कि कोई उन्हें हिला रहा है। जावेद का कहना है
कि भूकंप का खतरा भांपकर सभी लोग कारखाने से भाग खड़े हुए।
रविवार
को भूकंप के झटकाें से शहर के मोहल्ला गंगा नगर बीना तिवारी के मकान की 5
फीट लंबाई में दीवार चटक गई। मोहल्ला शमशेर खानी के रसीद के मकान की दीवार
में भी दरार आ गई। फतेहगढ़ में रहने वाले धर्मवीर गौतम के मकान की दीवार भी
चटक गई है।
गढ़ी कोहना मोहल्ले में मोबाइल शाप मालिक आफाक खां
कहते हैं कि रविवार दोपहर करीब 12.42 बजे जब वे दुकान में थे तो भूकंप के
झटके से उनकी कुर्सी हिल गई। साथ ही मोबाइल के डिब्बे भी नीचे आकर गिरे।
शनिवार
को सुबह 11.40 बजे और करीब 25 मिनट बाद दोबारा भूकंप के झटके महसूस हुए
थे। इससे अफरा तफरी मच गई थी। सोशल मीडिया पर रात 12 तक कई चरणाें में झटके
लगने के मैसेज भेजने से लोग अलर्ट रहे। घराें में जगराता होता रहा। लोगाें
ने मकान में सोने से परहेज किया।
लोग छताें पर बने रहे। जरा सी
आहट पर लोग घर से निकल भागने को तैयार हो जाते थे। गंगा नगर में रहने वाले
यादराम जोशी, लालाराम, प्रभुदयाल ईश्वर चंद्र चक्रवर्ती, सुरेश गुप्ता ने
बताया कि रात खौफ के साये में कटी। भूकंप के अंदेशे से रात भर जागते रहे।
भूकंप
के साथ ही शनिवार रात 12.30 बजे से सुबह 3.30 बजे तक कास्मेटिक रेज के
पृथ्वी के पास से गुजरने की सूचनाआें से लोगाें ने मोबाइल स्विच आफ कर लिए
थे। शहर के मोहल्ला इस्माइलगंज सानी निवासी पंकज बाथम ने बताया कि टीवी पर आ
रहे समाचारों से जानकारी मिली कि रात 1.40 से लेकर 3.45 बजे तक भूकंप के
झटके आ सकते हैं।
भूकंप के डर से बच्चों के साथ घर की छत पर बिस्तर
बिछाया। बच्चे सो गए लेकिन वे पत्नी निर्मला देवी के साथ जागते रहे। जब
कुछ नहीं हुआ तो सुबह 4.15 बजे नींद आई। राजीव गांधी नगर के संजय सिंह गौर
का कहना है कि भूकंप के डर से पूरी रात जागते हुए कटी।
बेटी खुशी,
मिली और पुत्र व पत्नी के साथ छत पर लेटे थे। भूकंप की चिंता से रात भर
नींद नहीं आई। सुबह आंख लगी। कालेज प्रबंधक हिमांशु शाक्य, शिक्षक सुब्रत
शाक्य राजन और जावेद खां कहते हैं कि भूकंप के खौफ के चलते पूरी रात जागते
हुए कटी।
सुबह करीब 3.45 बजे तक जब भूकंप के झटके नहीं आए सुबह सो
पाए। गढ़ी कोहना की रंजना पांडेय कहती हैं कि वह खतरे के डर से पति सुनील
कुमार के साथ पूरी रात छत पर टहलती रहीं।