फर्रुखाबाद। बुखार से पीड़ित ग्रामीण को निजी अस्पताल में हालत बिगड़ने पर लोहिया अस्पताल में भर्ती किया गया। इमरजेंसी में इलाज के दौरान पहुंचा एक बाहरी युवक बीमार की पत्नी को बहला फुसला कर निजी अस्पताल ले गया। वहां कुछ दवाएं और इंजेक्शन लगाए। कुछ ही घंटे में आंखों से दिखना बंद हो गया। मरीज के बताने पर पत्नी ने शिकायत की तो नौ हजार रुपये का बिल थमा दिया। सूचना पर पहुंचे परिजनों का गुस्सा देख बिना बिल लिए ही भेज दिया। लोहिया अस्पताल में दोपहर में मरीज ने दम तोड़ दिया।
शमसाबाद थाने के गांव उलियापुर निवासी भारत सिंह (55) कई दिन से बुखार से पीड़ित थे। पत्नी प्रेमकांती ने उन्हें बजरिया स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। पांच दिन इलाज के बाद हालत बिगड़ने पर बुधवार रात मना कर दिया। पत्नी ने रात एक बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कर दिया। सुबह पांच बजे एक युवक ने पत्नी को बहला फुसलाकर निजी अस्पताल के लिए राजी कर लिया। युवक एक एंबुलेंस से भारत सिंह को मसेनी रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले गया। भर्ती होने के दौरान कुछ दवाएं और इंजेक्शन लगाए गए।
गुरुवार सुबह आठ बजे भारत सिंह ने आंखों की रोशनी चली जाने की शिकायत की। प्रेमकांती ने अस्पताल में इसकी शिकायत की। मगर किसी ने कुछ न सुना। हालत बिगड़ने लगी, तो अस्पताल प्रशासन ने नौ हजार रुपये का बिल थमा दिया।
प्रेमकांती ने बताया कि उसके पास एक भी रुपये नहीं थे। उन्होंने अपने परिजनों को बुलाया। अस्पताल में भीड़ बढ़ने पर बिना रुपये लिए ही मरीज को बाहर ले जाने की इजाजत दे दी। परिजन दोपहर साढ़े 12 बजे लोहिया अस्पताल लेकर पहुंचे। तब तक हालत बिगड़ चुकी थी। कुछ देर इलाज के बाद भारत सिंह की मौत हो गई। पत्नी प्रेमकांती ने बताया कि लोहिया की इमरजेंसी में वह अकेली थी। युवक ने यहां सही इलाज न होने की बात कही। वह पति को खोना नहीं चाहती थी। लिहाजा वह ले जाने के लिए राजी हो गईं। निजी अस्पताल में कुछ देर इलाज के बाद रोशनी चली गई और शरीर में खुजली हो गई। परिजन बिना पुलिस कार्रवाई के ही शव लेकर चले गए।
प्रभारी सीएमएस डॉ. प्रभात वर्मा ने बताया कि इसकी जानकारी नहीं है। शिकायत आने पर जांच के बाद कार्रवाई करेंगे।