तेज हवाओं के चलने से खेत में गिरी गेहूं की फसल।
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फर्रुखाबाद। पिछले पांच दिनों से चल रही पछुआ हवाओं ने किसानों का चैन हराम कर दिया है। तेज पवन के झोंके से खेतों में खड़ी फसल सूख रही है। सिंचाई करने फसल जमीन पर गिरकर बिछी जा रही है।फसल के पककर तैयार होने के समय तेज हवाओं से किसान हक्के बक्के हैं। पश्चिम की ओर से आ रही तेज हवाओं से खेतों की नमी जल्दी खत्म हो रही है। इससे बार-बार खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही है।
एक बार में सिंचाई के लिए 150-160 रुपये प्रति घंटा का शुल्क देना पड़ता है। खेतों में बार -बार सिंचाई करने से गरीब किसानों की कमर टूटी जा रही है। टिकुरियन नगला निवासी किसान सूरज, राजवीर, अखिलेश, अनिल, दिनेश वर्मा आदि का कहना है कि इन दिनों में खेतों में एक बार सिंचाई करने पर 15 से 20 दिनों तक नमी बनी रहती थी लेकिन अब तेज हवाओं के चलने से जहां एक ओर नमी एक सप्ताह में समाप्त हो रही है, सिंचाई करने पर गेहूं की फसल गिर रही है। जमीन पर गिरी फसल खेत में भरे पानी में भीग जाती है। इससे फसल के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। अधिकतर छोटे किसान कर्ज लेकर ही गेहूं बोते हैं। आलू की फसल में हो रहे घाटे से उबरने के लिए गेहूं की फसल से आस लगाए बैठ हैं। कृषि वैज्ञानिक राजकिशोर का कहना है कि किसान सिंचाई के दौरान खेतों में अधिक पानी न भरे। थोड़ीे पानी से सिंचाई कर इस समस्या से निजात पा सकते हैं।