नवाबगंज। उखरा में 23 मकानों को प्रशासन की ओर से बुलडोजर से ढहाए जाने के बाद सोमवार को ग्रामीणों का दर्द बांटने गईं जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके भाई को भीड़ ने खदेड़ दिया। इस दौरान पथराव भी किया गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को शांत कराया।
थाना क्षेत्र के गांव उखरा में ग्रामसमाज की 105 बीघा बंजर भूमि है। गांव के 23 ग्रामीणों ने वर्ष 1990 में 20 बीघा से अधिक भूमि पर कब्जा कर मकान बना लिए थे। डीएम के आदेश पर दो दिन पहले तहसीलदार सदर श्रद्धा पांडेय ने पांच बुलडोजर से सभी मकान ढहा दिए थे।
मकान ढहाए जाने को लेकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर दी। उन्होंने इसे गलत बताया था। इसके बाद राजनीति होने लगी। सोमवार को जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका यादव और उनके भाई भाजपा नेता सचिन यादव समर्थकों के साथ ग्रामीणों से मिलने गांव में गए थे। ग्रामीणों ने भाजपा नेता व जिला पंचायत अध्यक्ष की बात सुनते ही विरोध प्रकट किया और उन्हें खदेड़ दिया। आरोप है कि इस दौरान कुछ लोगों ने पथराव भी किया।
वर्जन
उखरा गांव के ग्रामीणों का दर्द बांटने के लिए आए थे। इस दौरान गांव में बाहर के लोग आए थे। बाहरी लोगों ने विरोध किया। उखरा के ग्रामीण हमारे साथ हैं। पथराव की बात गलत है।
- मोनिका यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष
प्रशासन की कार्रवाई पर भाजपा नेता ने उठाए सवाल
फर्रुखाबाद। नवाबगंज के उखरा में सरकारी भूमि पर प्रशासन की ओर से कब्जा हटाने के मामले को भाजपा नेता शंकर सिंह ने गलत करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करके लिखा कि उत्तर प्रदेश की 75 फीसदी जनता गांव में निवास करती है। घर उजाड़ने वाले अधिकारी और नेताओं को सोचना चाहिए कि घर देने की हैसियत में नहीं हैं, तो लेने का भी हक नहीं है। आने वाले समाज को हम राजनीति में क्या संदेश दे रहे हैं। बदले की कार्रवाई से की गई कार्रवाई हितकर नहीं है। गरीब किसानोें की कोई जाति नहीं होती। उन्होंने इस पोस्ट को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री आदि बड़े नेताओं को भी टैग किया है। भाजपा नेता की पोस्ट की खासी चर्चा रही। (संवाद)