ऊगरपुर गांव में पानी से होकर निकलते ग्रामीण।
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बूढ़ी गंगा में नाव न चलने से ऊगरपुर के ग्रामीणों को आवागमन करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, ग्रामीण मुआवजा न मिलने का भी रोना रो रहे हैं। मंझा की मढ़ैया और ऊगरपुर में डॉक्टरों टीम ने मरीजों को दवा बांटी।
मंगलवार को गंगा में 26 हजार और रामगंगा में करीब नौ हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। ऊगरपुर के रहने वाले मुकेश कुमार, दीनदयाल और रामदीन आदि का कहना है कि बाढ़ के चलते तहसील मुख्यालय आने के लिए बूढ़ी गंगा, सोता नाला और गंगा नदी को पार करना पड़ता है। सोता नाला और गंगा नदी में तो नाव चल रही है लेकिन बूढ़ी गंगा में नाव बंद कर दी गई है। इसके चलते तहसील अमृतपुर आने के लिए करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। ग्रामीणों ने बूढ़ी गंगा में नाव चलवाए जाने की मांग की है।
सुदेशचंद्र, सत्यपाल, अनिल कुमार, मौदू, राम देवी, भूरी देवी और मुरारीलाल आदि ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ में उनकी झोपड़ियां और कच्चे मकान गिर गए थे। अभी तक न तो उनका सर्वे किया गया और न ही मुआवजा मिला है। मंझा की मड़ैया में अभी भी ग्रामीण नाव से ही आवागमन कर रहे हैं। मंझा की मड़ैया में चिकित्सकीय टीम ने 67 और ऊगरपुर में डॉ. पुनीत पांडेय की टीम ने 97 मरीजों को दवा बांटी।