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संविदा कर्मियों की हड़ताल से टीबी मरीज हलाकान है। हड़ताल के कारण न तो मरीज की जांच और दवा वितरण में दिक्कत है। टीबी की दवा में गैप रोगियों को मौत के मुहाने पर ला सकती है।
अपनी मांगों को लेकर संविदाकर्मी पांच सितंबर से हड़ताल पर हैं। क्षय रोग विभाग में कार्यरत तकरीबन 31 संविदाकर्मी भी उनके समर्थन में हैं। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। टीबी में दवा का गैप रोगियों की समस्याओं को बढ़ा रहा है।
कमालगंज के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. मान सिंह वर्मा ने बताया कि क्षय रोग तीन तरह का होता है। टाइप 1 के रोगी को यदि दवा मिलने में गैप हो जाता है तो वह टाइप 2 में चला जाता है और टाइप 2 में यदि दवा में गैप होता है तो रोगी एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंस) में चला जाता है।
उस पर फिर कोई दवा असर नहीं करती है। उनका मानना है कि उनके यहां तकरीबन 94 रोगी टाइप 1 के हैं।नवाबगंज के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रभात वर्मा ने बताया कि 150 रोगी टाइप 1 क्षय रोग से पीड़ित हैं। मोहम्मदाबाद में 187 रोगी टाइप 1 क्षय रोग से पीड़ित हैं। यहां के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव का मानना है कि संविदा कर्मियों की हड़ताल से खसी परेशानी है।
इसी तरह से शमसाबाद, बढ़पुर और कायमगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर क्षय रोगियों की काफी संख्या है। लोहिया अस्पताल, सेंट्रल जेल और जिला जेल मिलाकर करीब एक हजार रोगी टाइप 1 क्षय रोग से पीड़ित हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि टाइप 1 के रोगी की दवा छह माह तक चलती है।
यदि दवा में गैप होता है तो टाइप 2 के रोगी की दवा नौ माह तक चलती है। सीएमओ ने कहा कि इस विषम समस्या का समाधान करने के लिए बुधवार को जिला क्षय रोग अधिकारी को निर्देश दिए जाएंगे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जो परमानेंट स्टाफ मौजूद है। उससे दवा का वितरण कराया जाएगा।